Article

समाजवादी पार्टी के नेता राजपाल सिंह यादव का निधन, सैफई में होगा अंतिम संस्कार

 07 Apr 2026

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के चाचा, राजपाल सिंह यादव का निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार थे और उनका इलाज गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने गुरुवार तड़के 4 बजे अंतिम सांस ली। राजपाल सिंह यादव के निधन से परिवार और उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है। वे एक लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, और उनकी बीमारी के बाद से ही परिवार में चिंता बनी हुई थी। राजपाल सिंह यादव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सैफई में किया जाएगा। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर अब गुरुग्राम से सैफई के लिए रवाना कर दिया गया है। 


शव के सैफई पहुंचने की संभावना दोपहर 1 बजे तक है, जहां अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आवास पर स्थित गेस्ट हाउस में रखा जाएगा। वहां परिवार, रिश्तेदार और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद, शाम 5 बजे सैफई में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजपाल सिंह यादव के भाई और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "मैं अत्यंत दुख के साथ यह सूचित कर रहा हूँ कि मेरे अनुज राजपाल सिंह का आज सुबह चार बजे मेदांता अस्पताल गुड़गांव में असामयिक निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार मेरे पैतृक गांव सैफई में आज दोपहर बाद किया जाएगा। प्रभु उनकी आत्मा को शांति दे और उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति!" राजपाल सिंह यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे। वह मुलायम सिंह से छोटे और शिवपाल यादव से बड़े थे, जो मुलायम सिंह के सबसे छोटे भाई हैं। उनके निधन से पार्टी और परिवार में एक खालीपन का आभास हो रहा है। 

राजपाल यादव के परिवार में उनका बेटा अंशुल यादव भी राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं, और उन्हें हाल ही में लगातार दूसरी बार निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया है, जो उनके परिवार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। राजपाल सिंह यादव की पत्नी प्रेमलता यादव भी राजनीति में सक्रिय रही हैं और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनके निधन से ना केवल परिवार, बल्कि उनके समर्थकों और समाजवादी पार्टी को भी एक बड़ी क्षति हुई है।