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ISRO के नए अध्यक्ष वी नारायणन का परिचय: जानें उनकी वैज्ञानिक यात्रा और प्रमुख उपलब्धियां

 09 Apr 2026

ISRO चीफ एस सोमनाथ की रिटायरमेंट के साथ चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद भारत को ऐतिहासिक सफलता दिलाने के बाद, उनकी जगह डॉ. वी. नारायणन की नियुक्ति की गई है। सरकार ने इस नियुक्ति का ऐलान कर दिया है। सोमनाथ का कार्यकाल 14 जनवरी को समाप्त हो रहा है, और डॉ. वी. नारायणन को अगले दो साल या आगामी आदेश तक इसरो प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।


डॉ. वी. नारायणन कौन हैं?


डॉ. वी. नारायणन एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने रॉकेट साइंस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है। वर्तमान में, वह इसरो के प्रमुख केंद्रों में से एक, एलपीएससी के निदेशक हैं, जिसका मुख्यालय तिरुवनंतपुरम के वलियमाला में स्थित है। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में एम टेक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी पूरी की है। उनकी वैज्ञानिक यात्रा विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) से शुरू हुई, जहां उन्होंने साउंडिंग रॉकेट्स और सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा, चंद्रयान-3 मिशन और गगनयान प्रोजेक्ट में भी उनकी भूमिका रही है।

चंद्रयान-3 में महत्वपूर्ण भूमिका


वी. नारायणन का चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम के विकास में अहम भूमिका निभाई, जो भारत को ऐसी तकनीक वाले छह देशों में शामिल करता है। इसी तकनीक से चंद्रयान-2 और एलवीएम3/चंद्रयान-3 को लॉन्च किया गया था, जिससे भारत ने चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई।

एस सोमनाथ का कार्यकाल


ISRO के मौजूदा प्रमुख एस सोमनाथ ने जनवरी 2022 में इसरो के चीफ के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके नेतृत्व में भारत ने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की, जिससे भारत अमेरिका, सोवियत यूनियन और चीन के बाद चांद के सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया। उनके कार्यकाल के दौरान गगनयान प्रोजेक्ट में भी भारत ने कई अहम मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसरो की इस नई यात्रा के साथ, डॉ. वी. नारायणन के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में नई ऊंचाइयां हासिल करने की उम्मीद है।

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