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बिहार से लापता नथुनी पाल 17 साल बाद झांसी में मिला, हत्या के आरोप में जेल गए परिवार वाले हैरान

 13 Apr 2026

17 साल पहले बिहार से अचानक लापता हुए एक व्यक्ति की हत्या के आरोप में उसके तीन चचेरे भाइयों को जेल की सजा भुगतनी पड़ी, लेकिन अब उस शख्स का पता चल गया है, जो झांसी के एक गांव धवारा में संदिग्ध हालात में पुलिस के हाथों में मिला। इस खबर ने उसके परिवारवालों को चौंका दिया और उनके होश उड़ गए। बिहार से आई पुलिस अब उस व्यक्ति से पूछताछ कर रही है। यह व्यक्ति बिहार के रोहतास जिले के अकोड़ी गोला थाना क्षेत्र के गांव देवरिया पोस्ट पलेजा का रहने वाला है, जिसका नाम 50 वर्षीय नथुनी पाल है। 


नथुनी पिछले छह महीने से झांसी के गांव धवारा में किसान धर्मदास अहिरवार के यहां शरण लिए हुए था और उनकी खेती-बाड़ी में मदद कर रहा था। सोमवार को बरुआसागर थाने के धमना चौकी प्रभारी नबाब सिंह गश्त पर थे। रास्ते में उन्हें एक संदिग्ध व्यक्ति नजर आया, जिसकी पहचान नथुनी पाल के रूप में हुई। चौकी प्रभारी ने उससे पूछताछ की और उसने अपने घर का पता बताया। इसके बाद, चौकी प्रभारी ने बिहार के अकोड़ी गोला थाना से संपर्क किया, तो वहां की जानकारी ने पुलिस को हैरान कर दिया। बताया गया कि नथुनी पाल की 17 सितंबर 2008 को हत्या हो चुकी थी और उसके चाचा रती पाल और उसके चार बेटों पर हत्या का आरोप था। 

यह खबर सुनकर बिहार पुलिस के होश उड़ गए और वे झांसी के लिए रवाना हो गए। नथुनी पाल के जीवन की यह कहानी भी उतनी ही चौंकाने वाली है। नथुनी के पिता रामचंद्रपाल और मां की मौत के बाद, उसे उसके चाचा रती पाल ने अपनी देखभाल में लिया। रती पाल के चार बेटे—विमलेश, भगवान, सतेंद्र और जितेंद्र—थे। 17 सितंबर 2008 को नथुनी अचानक लापता हो गया, और उसके मामा बाबूलाल ने आरोप लगाया कि नथुनी के चाचा रती और उसके बेटे ने उसे अपहरण कर लिया और फिर उसकी हत्या कर दी, ताकि वह जमीन पर कब्जा कर सकें। उनका आरोप था कि नथुनी की लाश को जमीन में दफन कर दिया गया। 

इसके बाद, इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई और विमलेश पाल, भगवान और सतेंद्र को हत्या के आरोप में सात से आठ महीने तक जेल में रहना पड़ा। मुकदमे के दौरान, नथुनी के चाचा रती पाल की मौत हो गई, जबकि जितेंद्र पाल का नाम पुलिस ने मामले से बाहर कर दिया था। अब 17 साल बाद जब नथुनी पाल खुद जीवित पाया गया है, तो यह मामला और भी रहस्यमय हो गया है। उसके परिवार वालों के लिए यह खबर किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि उन्होंने उसे मृत मान लिया था। बिहार पुलिस अब नथुनी से पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह इतने सालों तक कहां रहा और उसका लापता होना वास्तव में किस तरह का मामला था। साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर वह जीवित था, तो उसे हत्या का आरोपी क्यों बनाया गया और उसके परिवार के तीन सदस्य क्यों जेल गए।

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