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Nithari Case: SC 25 मार्च 2025 से शुरू करेगा अंतिम बहस, आरोपित कोली को बरी किए जाने पर होगी सुनवाई
16 Apr 2026
Nithari Case : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर 25 मार्च 2025 से अंतिम बहस शुरू करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वह इस घृणित हत्याकांड से जुड़े सभी मामलों के रिकॉर्ड को शीघ्रता से जिला अदालत से मंगवाए और उन दस्तावेजों की प्रति संबंधित पक्षों को प्रदान करे। इस निर्देश को जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की अपील पर विचार करते हुए दिया।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील रखते हुए कहा कि निठारी कांड बेहद गंभीर और वीभत्स हत्याओं से संबंधित है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी बताया कि सुरेंद्र कोली एक सीरियल किलर था, जो छोटी लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनकी हत्या करता था। इसके साथ ही सीबीआई ने यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ नरभक्षण के गंभीर आरोप थे और सुरेंद्र कोली को सत्र अदालत ने मौत की सजा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पंढेर और कोली को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई, उत्तर प्रदेश सरकार और पीड़ित लड़कियों के एक पिता पप्पू लाल की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई करने की सहमति दी थी। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अंतिम बहस की तारीख तय करते हुए कहा कि 25 मार्च 2025 से सुनवाई की जाएगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में अपने फैसले में सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को पलटते हुए मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रहा और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामले को वह मानदंडों के मुताबिक साबित नहीं कर पाया।
इससे पहले सत्र अदालत ने निठारी हत्याकांड में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर को दो मामलों में और सुरेंद्र कोली को 12 मामलों का दोषी ठहराते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। इस मामले में 2007 में कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें पीड़ित लड़कियों की गिनती बढ़ती गई और इस कांड ने देशभर में हड़कंप मचा दिया था।
यह मामला केवल हत्या का नहीं था, बल्कि इसमें नरभक्षण और छोटे बच्चों की क्रूर हत्याओं के आरोप भी शामिल थे। सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ आरोप थे कि उन्होंने अपनी दरिंदगी से निर्दोष बच्चों की जान ली और उन्हें इस दुनिया से काट दिया।
यह कांड एक तरह से एक और चेतावनी बनकर सामने आया था कि समाज में ऐसे हैवानियत भरे अपराधों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता और ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन सभी आरोपों को नकारते हुए यह कहा था कि इन आरोपियों का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं थे। अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की अंतिम बहस होगी और यह फैसला निश्चित करेगा कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को क्या सजा मिलती है।
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