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9 साल बाद जस्टिन ट्रूडो ने दिया इस्तीफा, कनाडा में राजनीतिक संकट गहराया
20 Apr 2026
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी सरकार और व्यक्तिगत आलोचनाओं के बीच अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। देश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मैं नए नेता के चयन के बाद पार्टी नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दूंगा।" उन्होंने लिबरल पार्टी के अध्यक्ष से नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। ट्रूडो ने स्पष्ट किया कि अगले नेता के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
9 सालों की प्रधानमंत्री की पारी का अंत
जस्टिन ट्रूडो, जो पिछले 11 वर्षों से लिबरल पार्टी के नेता और 9 साल से कनाडा के प्रधानमंत्री रहे हैं, ने विभिन्न राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। इनमें डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों से निपटना, प्रमुख मंत्रियों के इस्तीफे, और जनमत सर्वेक्षणों में गिरावट शामिल है। 53 वर्षीय ट्रूडो ने संसद की कार्यवाही 24 मार्च तक स्थगित करने का ऐलान भी किया।
ओटावा में सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, "यह देश अगले चुनाव में एक वास्तविक विकल्प का हकदार है। यह मेरे लिए स्पष्ट हो गया है कि अगर मुझे आंतरिक लड़ाई लड़नी पड़े, तो मैं उस चुनाव में सबसे उपयुक्त विकल्प नहीं रहूंगा।"
विपक्ष के दबाव और संसद में गतिरोध
विपक्ष लंबे समय से ट्रूडो के इस्तीफे की मांग कर रहा था। संसद में विपक्षी सांसद लगातार हंगामा कर रहे थे, जिससे सरकार के कामकाज पर असर पड़ा। ट्रूडो ने अपने संबोधन में कहा, "सच यह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद, संसद महीनों से ठप पड़ी है। एक नया प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी का नेता अगले चुनाव में अपने मूल्यों और आदर्शों को लेकर जाएगा।"
ट्रूडो ने यह भी बताया कि उन्होंने गवर्नर-जनरल से मुलाकात कर अपनी योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "आज सुबह मैंने गवर्नर-जनरल को सलाह दी कि संसद का नया सत्र बुलाने की जरूरत है। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। अब सदन 24 मार्च तक स्थगित रहेगा।"
अविश्वास प्रस्ताव और चुनाव की संभावना
कनाडाई संसद की कार्यवाही 27 जनवरी को फिर से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब यह 24 मार्च तक स्थगित रहेगी। विपक्षी दलों ने सरकार को गिराने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई थी। माना जा रहा है कि मई में विपक्षी पार्टियां सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि संसद के दोबारा शुरू होने के बाद विपक्ष ट्रूडो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेगा, जबकि अक्टूबर में देश में आम चुनाव कराए जा सकते हैं।
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