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पंजाब सरकार को SC की चेतावनी, खट्टर ने किसान आंदोलनकारियों को दी बिना शर्त वार्ता की नसीहत

 01 May 2026

पंजाब और हरियाणा को जोड़ने वाले खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन लगातार जारी है, और यहां बड़ी संख्या में किसान अपने अधिकारों के लिए डटे हुए हैं। इस बीच, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल, जो पिछले डेढ़ महीने से आमरण अनशन पर हैं, की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि डल्लेवाल को अस्पताल ले जाकर उनका इलाज किया जाए, लेकिन पंजाब सरकार के अधिकारी अब तक इस आदेश को लागू करने में असफल रहे हैं। इस पर आज पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी के खिलाफ अवमानना की याचिका पर सुनवाई होने वाली है। इस मामले को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट पंजाब सरकार के खिलाफ कड़ा फैसला दे सकता है, जो एक बड़े राजनीतिक और कानूनी मोर्चे को प्रभावित करेगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच द्वारा की जाएगी।


 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, आंदोलन स्थल से 700 मीटर की दूरी पर ही चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और डल्लेवाल को वहां शिफ्ट कर उनका इलाज सुनिश्चित किया जाए। लेकिन पंजाब सरकार के अधिकारियों द्वारा इस आदेश पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है, जिसके चलते डल्लेवाल की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती जा रही है। रविवार को, पटियाला के एसएसपी नानक सिंह और पूर्व डीआईजी नरिंदर भार्गव ने किसान नेताओं से मुलाकात की, लेकिन डल्लेवाल के अनशन को खत्म करने या उन्हें अस्पताल शिफ्ट करने पर कोई सहमति नहीं बन पाई। किसान नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि जब तक केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उनके साथ बातचीत के लिए नहीं आएंगे, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। इसके अलावा, वे एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कानून बनाने के अपने मुद्दे पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपनी आंदोलन की दिशा नहीं बदलेंगे।

 इस बीच, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसान आंदोलनकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि यदि वे बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए तैयार होते हैं, तो इस विवाद का हल निकल सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही बातचीत के लिए पेशकश कर चुकी है, लेकिन किसान आंदोलनकारियों को बिना शर्त बातचीत के लिए आना चाहिए। खट्टर ने यह भी आरोप लगाया कि किसान सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी से भी बातचीत करने के लिए आगे नहीं आए हैं, जो यह दर्शाता है कि वे समाधान की ओर बढ़ने के लिए गंभीर नहीं हैं। उन्होंने यह टिप्पणी की कि किसानों द्वारा बातचीत के लिए शर्तें रखना ठीक नहीं है और उन्हें अपने मुद्दों का हल निकालने के लिए सहयोग करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री का यह बयान इस बात को और स्पष्ट करता है कि सरकार का मानना है कि बिना किसी शर्त के वार्ता से ही इस गतिरोध को खत्म किया जा सकता है। 

खट्टर ने कहा, "केंद्र सरकार ने पहले ही किसानों से बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन किसानों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से भी बातचीत नहीं की। इससे यह साफ है कि किसान बातचीत के लिए इच्छुक नहीं हैं।" उनका कहना था कि सरकार और किसानों के बीच अगर कोई मतभेद हैं, तो उन्हें बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को सहमति बनानी होगी। इस मामले में अब यह देखना होगा कि पंजाब सरकार पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई कठोर कदम उठाया जाता है या नहीं, और क्या किसानों और सरकार के बीच किसी समझौते की संभावना बनती है।

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