कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे की चर्चा तेज़ हो गई है। कनाडा के प्रमुख समाचार पत्र द ग्लोब एंड मेल ने रविवार को एक रिपोर्ट में दावा किया कि ट्रूडो जल्द ही लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है और हाल के सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि आगामी चुनाव में पिएरे पोलिएवरे के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी सत्ता में आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रूडो बुधवार को होने वाली राष्ट्रीय कॉकस बैठक से पहले इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन फिलहाल उनकी इस्तीफे की तारीख की पुष्टि नहीं हो पाई है।
एनडीपी द्वारा समर्थन वापसी
हाल ही में, जस्टिन ट्रूडो को एनडीपी (न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी) का समर्थन भी वापस मिल चुका है। इस पार्टी के नेता जगमीत सिंह ने ट्रूडो सरकार से अपनी पार्टी का समर्थन हटा लिया था। साथ ही, एक हालिया सर्वे में यह भी कहा गया कि 73 प्रतिशत कनाडाई नागरिक चाहते हैं कि ट्रूडो प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दे दें, जिनमें 43 प्रतिशत लिबरल मतदाता भी शामिल हैं।
ट्रूडो सरकार की घटती लोकप्रियता के कारण
ट्रूडो सरकार की लोकप्रियता में गिरावट की कई वजहें हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण कनाडा की अर्थव्यवस्था, घरों की बढ़ती कीमतें, अप्रवासी मुद्दे और कोरोना महामारी के बाद बढ़ी महंगाई हैं। महंगाई दर 8 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, हालांकि अब यह घटकर दो प्रतिशत से नीचे आ चुकी है। बेरोजगारी दर भी एक बड़ा मुद्दा है, जो वर्तमान में छह प्रतिशत के आसपास है।
महंगे घर और अप्रवासी मुद्दे
कनाडा में महंगे घरों की समस्या बड़ी बन चुकी है। विशेष रूप से बड़े शहरों में घर खरीदना आम आदमी के लिए मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, ट्रूडो सरकार द्वारा अप्रवासी नीति में हाल में किए गए बदलावों के बावजूद, लोग इस मुद्दे पर नाराज हैं। बढ़ते अप्रवासियों की संख्या ने कनाडा की स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य सेवाओं पर भारी दबाव डाला है, जिससे सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है।
खालिस्तानियों का बढ़ता प्रभाव
कनाडा में खालिस्तान समर्थकों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी कई नागरिक असंतुष्ट हैं। हाल के महीनों में इस मुद्दे ने कनाडाई राजनीति में भी तूल पकड़ा है। इसके अलावा, कनाडा की डिप्टी पीएम और वित्त मंत्री ने हाल ही में इस्तीफा दिया था, जिसके बाद ट्रूडो पर इस्तीफे का दबाव और भी बढ़ गया है।
इन सभी कारणों के चलते जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर इस्तीफा देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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