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लद्दाख और ब्रह्मपुत्र पर चीन की गतिविधियाँ: भारत ने उठाया बड़ा सवाल

 04 May 2026

पड़ोसी देश चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों से बाज नहीं आ रहा और भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की कोशिशें लगातार जारी रखे हुए है। हाल ही में, चीन ने लद्दाख के निकट स्थित एक क्षेत्र में दो नए काउंटियों का निर्माण शुरू किया है, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय लद्दाख क्षेत्र में भी पड़ रहा है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल, चीनी सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ ने 27 दिसंबर को खबर दी थी कि उत्तर-पश्चिमी चीन के झिजियांग उइगर क्षेत्र की सरकार ने दो नए काउंटियां, हेआन और हेकांग, बनाने का ऐलान किया है। इनमें से कुछ क्षेत्र लद्दाख में भी शामिल हो रहे हैं, जिस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज किया है।


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में चीन के अवैध कब्जे का विरोध करता है और ऐसे किसी भी प्रयास को मान्यता नहीं देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाई से भारत की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, और न ही चीन के कब्जे को वैधता मिल सकती है। कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से इस विरोध को चीन तक पहुंचाया गया है। इस संदर्भ में, चीनी मीडिया ने बताया कि हेआन काउंटी की सीट हांगलिउ टाउनशिप है, जबकि हेकांग काउंटी की सीट ज़ेयिडुला टाउनशिप है।

हालांकि, भारत इसे लद्दाख के क्षेत्र में चीन की अप्रत्याशित दखलअंदाजी मान रहा है और इसका विरोध कर रहा है। इसके अलावा, भारत ने चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर जलविद्युत परियोजना निर्माण की भी चिंता जताई है। शिन्हुआ ने 25 दिसंबर को यह जानकारी दी थी कि चीन तिब्बत क्षेत्र में यारलुंग त्सांगपो नदी पर एक डैम बना रहा है। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने विशेषज्ञ स्तर पर और कूटनीतिक माध्यमों से चीन से अपनी चिंता व्यक्त की है, विशेष रूप से जल परियोजनाओं के प्रभाव के संदर्भ में।

भारत ने जोर देकर कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर पारदर्शिता और निचले देशों के साथ संवाद की आवश्यकता है। चीन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि ब्रह्मपुत्र नदी के निचले देशों के हितों को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। भारत अपनी संप्रभुता और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सतत निगरानी और आवश्यक कदम उठाता रहेगा।

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