कासगंज में 2018 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा यात्रा के दौरान चंदन गुप्ता उर्फ अभिषेक गुप्ता की गोली मारकर हत्या के मामले में सभी 28 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। एनआईए की विशेष अदालत के जज विवेकानंद सरन त्रिपाठी ने एक दिन पहले सभी 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था। उम्रकैद के साथ ही उन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है। सभी को हत्या के लिए उम्रकैद और तिरंगे के अपमान के आरोप में तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। मुख्य आरोपी सलीम और अन्य छह लोगों को आर्म्स एक्ट के तहत भी सजा मिली है।
जेल से लॉकअप गाड़ी के न आने के कारण सभी दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के लिए पेश किया गया।
जिस दिन दोषी ठहराए गए थे, उस दिन गैरहाजिर रहने वाले आरोपी सलीम ने सुबह अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। एक अन्य आरोपी असीम कुरैशी और नसरुद्दीन को संदेह के लाभ के आधार पर बरी कर दिया गया। सजा के सुनाए जाने पर 26 आरोपी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित थे। आरोपी मुनाजिर रफी पहले से एक अन्य मामले में कासगंज जेल में बंद थे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा पेश हुए। मुख्य आरोपी सलीम गैरहाजिर रहा और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
सभी आरोपियों पर बलवा, नाजायज जमाव, ईंट-पत्थर से चोट पहुंचाना, जानलेवा हमला, हत्या, गाली-गलौज, जानमाल की धमकी, और देशद्रोह-ध्वज अपमान निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे। कुल 12 गवाह पेश किए गए, जिनमें चंदन के पिता सुशील गुप्ता और उसके भाई विवेक गुप्ता शामिल थे। सभी आरोपी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147, 148, 149, 341, 336, 307, 302, 504, 506 और 2 राष्ट्र ध्वज अपमान निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए।
तिरंगा यात्रा के दौरान क्या हुआ इसका संक्षेप में उल्लेख करते हुए, चंदन के पिता द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, गणतंत्र दिवस पर तिरंगा जुलूस तहसील रोड से गुजरते हुए राजकीय बालिका कॉलेज के गेट के सामने पहुँचा।
तभी कुछ हथियारबंद लोग घात लगाकर आए और तिरंगा छीनकर उसे फेंक दिया, साथ ही पाकिस्तान जिंदाबाद और हिन्दुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। जब चंदन और अन्य ने इसका विरोध किया, तो उन पर पथराव और फायरिंग की गई। सलीम ने चंदन को निशाना बनाकर गोली मारी। चंदन को गंभीर अवस्था में भाई विवेक ने पहले थाना कासगंज और फिर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस गोलीबारी में कई अन्य लोग भी घायल हुए। चंदन को न्याय दिलाने के लिए विवेक ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी, और उन्होंने कासगंज से लखनऊ कोर्ट में हर पेशी पर सफर किया।
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