पटना में बीपीएससी छात्रों द्वारा पिछले 10 दिनों से ज्यादा समय से चल रहे धरना प्रदर्शन पर नीतीश सरकार ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मीडिया के सामने आकर इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस विवाद पर निर्णय बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ही लेगा और सरकार ने आयोग को पूरी स्वतंत्रता दी हुई है कि वह छात्रों के हित में जो भी कदम उठाए, वह स्वतंत्र रूप से उसे लागू कर सके।
सम्राट चौधरी ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई थी, और इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने का काम बिहार लोक सेवा आयोग का है।
इससे पहले छात्रों की ओर से किए गए लगातार प्रदर्शन और लाठीचार्ज की घटनाओं के बाद विपक्षी दलों ने भी इस मामले को जोर-शोर से उठाया था। विपक्ष के नेता विशेष रूप से बिहार विधानसभा में सीपीआई (ML) और कांग्रेस के विधायक इस मुद्दे को लेकर राजभवन तक मार्च करने का आह्वान कर चुके थे। इसके बावजूद नीतीश सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था, लेकिन अब पहली बार डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया दी और साफ किया कि इस मामले में बिहार सरकार ने बिहार लोक सेवा आयोग को पूरी स्वतंत्रता दी है और आयोग छात्रों के हित में जो भी निर्णय लेगा, उस पर सरकार का पूरा समर्थन रहेगा।
इसके अलावा, सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा किए जा रहे हमलों पर उनका कहना था कि बिहार की सरकार ने हमेशा स्वतंत्र संस्थाओं को अपने काम करने का पूरा अधिकार दिया है। उनका कहना था कि दूसरी सरकारें भी कभी इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती थीं, और अब भी बिहार लोक सेवा आयोग को इस मुद्दे पर फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।
इससे पहले, बीपीएससी छात्रों ने बिहार के राजनीतिक नेताओं से भी मुलाकात की थी।
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा से मिला था। इस मुलाकात के बाद पप्पू यादव ने मीडिया को बताया था कि मुख्य सचिव ने छात्रों की समस्याओं पर संज्ञान लिया है और आश्वासन दिया है कि इस मामले पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद पप्पू यादव ने राज्यपाल से भी मुलाकात की थी, जिसमें राज्यपाल ने भी छात्रों की समस्याओं पर ध्यान दिए जाने की बात कही थी और कहा था कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी।
बीपीएससी छात्रों का प्रदर्शन तब से जारी है जब से उन्होंने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और गलतियों को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज की थीं। छात्रों ने अपनी मांगों में बीपीएससी परीक्षा को दोबारा कराने, परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच कराने और परीक्षा में बैठने वाले सभी छात्रों को एक समान अवसर देने की मांग की थी। छात्रों का कहना है कि वे सरकार से जल्द समाधान की उम्मीद करते हैं ताकि उनका प्रदर्शन खत्म हो सके और वे नए साल के मौके पर अपने घरों पर लौट सकें।
बीपीएससी की ओर से पहले ही इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्यभर में 912 परीक्षा केंद्रों में से 911 केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की गई थी और किसी भी जिले से गड़बड़ी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी। हालांकि, एक परीक्षा केंद्र में कुछ खामियों के कारण उसे रद्द कर दिया गया था, लेकिन पूरी परीक्षा को रद्द करने का कोई आधार नहीं था। आयोग के अध्यक्ष ने भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं हुई है और परीक्षा को रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
इस बीच छात्रों का प्रदर्शन जारी है और उनका कहना है कि वे अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार जल्द ही इस पर निर्णय लेगी। उनका कहना है कि वे नए साल से पहले घर लौटने की उम्मीद में हैं और सरकार से सकारात्मक कदम की उम्मीद करते हैं।
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