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केजरीवाल ने मौलवियों को 10 साल में जितना दिया, पहले पुजारियों को वह राशि दी जाए: गिरिराज सिंह

 25 May 2026

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक ऐसा वादा किया है, जो लंबे समय से उसकी आलोचना का कारण बना हुआ था। 'आप' सरकार, जो पिछले कई वर्षों से इमामों को वेतन देती रही है, अब उसने दिल्ली के पुजारियों और ग्रंथियों के लिए भी 18 हजार रुपये मासिक सम्मान राशि देने का वादा किया है, अगर पार्टी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करती है। यह घोषणा दिल्ली सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, लेकिन इस पर विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने जोरदार हमले शुरू कर दिए हैं। 


भाजपा ने इस वादे को चुनावी नाटक करार दिया है और आरोप लगाया है कि यह वादा सिर्फ वोटों की राजनीति के लिए किया जा रहा है। भा.ज.पा. ने कहा है कि दिल्ली सरकार को पहले पुजारियों और ग्रंथियों को पिछले 10 सालों का एरियर देना चाहिए। भाजपा के नेताओं का कहना है कि जिस तरह इमामों को वेतन दिया गया, उसी तरह पहले पुजारियों और ग्रंथियों को भी 10 सालों का एरियर दिया जाना चाहिए, और तभी इस वादे को लेकर कोई सच्चाई दिखाई देगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्विटर पर एक वीडियो जारी करते हुए केजरीवाल सरकार से तुरंत एरियर देने की मांग की। उन्होंने कहा, "10 साल तक दिल्ली सरकार ने मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को अपनी सूची में नहीं रखा। 

अब चुनावी फायदे के लिए नया नाटक शुरू किया है।" गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने हिन्दू और सिख धार्मिक नेताओं को हमेशा नजरअंदाज किया, जबकि इमामों को वेतन दिए जाने को प्राथमिकता दी गई। गिरिराज सिंह ने कहा, "केजरीवाल जी, आप तो गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलते हैं। पहले आपने महिलाओं को 'बुरबक' बनाने की कोशिश की थी, अब आप धार्मिक नेताओं को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। अगर सच में इनको सम्मान देना चाहते हैं, तो पहले 10 साल में इमामों को जितना वेतन दिया गया, वह जोड़कर पुजारियों और ग्रंथियों को एकमुश्त एरियर दीजिए, तभी समझेंगे कि आपको वाकई इनका भला करने की इच्छा है।"

गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि केजरीवाल सरकार की राजनीति में हमेशा चुनावी रणनीति शामिल रहती है और यह वादा भी उसी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि वह कभी हनुमान जी के भक्त बनते हैं, तो कभी खुदा के भक्त बनने का नाटक करते हैं, लेकिन असलियत में उनका सेक्युलरिज्म नकली है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इस समय केजरीवाल को सिर्फ चुनावी लाभ की चिंता है, और इसलिए चुनावी लाभ के लिए उन्होंने पुजारियों और ग्रंथियों के लिए यह घोषणा की है, जो अब तक उपेक्षित थे। इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस वादे को एक सकारात्मक कदम बताया है और कहा है कि दिल्ली सरकार हमेशा सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान दृष्टिकोण रखती है। हालांकि भाजपा का आरोप है कि यह एक झूठा वादा है और इससे हिंदू और सिख समुदाय के धार्मिक नेताओं को ठगने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं 'आप' ने इसे केवल एक चुनावी वादा करार दिया है।