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केरल को मिनी पाकिस्तान कहने पर नितेश राणे ने दी कांग्रेस को चुनौती, बोले- 'मुझे गलत साबित कर दो'

 26 May 2026

केरल को "मिनी पाकिस्तान" कहने पर भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी है। उन्होंने यह कहा कि उनका यह बयान केरल में बढ़ते धर्मांतरण और वहां के हिंदू समुदाय की घटती संख्या को लेकर था। नितेश राणे ने आरोप लगाया कि केरल में हिंदुओं का ईसाई या मुसलमान बनना आम बात हो गई है, और यह स्थिति वहां के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रही है। 

इस विवादित बयान के बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल केरल की गंभीर स्थिति को उजागर करना था, ताकि लोग जान सकें कि वहां क्या हो रहा है। राणे ने पुणे के पुरंदर तालुका में एक रैली के दौरान यह बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था, "केरल मिनी पाकिस्तान बन चुका है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वहां से चुनाव जीतते हैं क्योंकि उन्हें आतंकवादियों का समर्थन प्राप्त है। उनके इस बयान पर काफी बवाल मचने के बाद नितेश राणे ने सफाई दी और कहा, "केरल भारत का ही हिस्सा है, लेकिन वहां हिंदुओं की संख्या तेजी से घट रही है। यह चिंता का विषय है।" उन्होंने कहा कि धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर वहां तेजी से स्थिति बिगड़ रही है, और इस पर समाज को जागरूक होना चाहिए।

नितेश राणे ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखी है और यह स्थिति बेहद गंभीर है। उनका दावा था कि एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उसने 12 हजार हिंदू महिलाओं को इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने से रोका। राणे ने केरल की इस स्थिति को पाकिस्तान जैसी बताया और कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो यह स्थिति और भी खराब हो सकती है। उन्होंने विपक्ष और कांग्रेस को चुनौती दी कि यदि उनके बयान में कोई झूठ है, तो वह इसे साबित करें।

इसके अलावा, नितेश राणे ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके चुनाव जीतने के पीछे वहां के कुछ आतंकवादियों का समर्थन है, और इस संदर्भ में उन्होंने वायनाड क्षेत्र का उदाहरण दिया। राणे के इस बयान ने एक बार फिर से राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है, क्योंकि इससे पहले भी उनके विवादित बयान चर्चा में रहे हैं। उनका यह बयान लोकसभा चुनाव के दौरान भी एक और विवाद का हिस्सा बना था। उनकी इस सफाई के बाद भी विवाद जारी है, और विपक्ष ने इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करार दिया है, जबकि राणे ने इसे सिर्फ सच्चाई सामने लाने की कोशिश बताया है।