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केजरीवाल के 'पुजारी कार्ड' पर BJP का पलटवार, मौलिवियों को 58 करोड़ देने के बाद अब राम-राम

 26 May 2026

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में एक अहम घोषणा की, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली में उनकी सरकार बनती है, तो वे पुजारियों और ग्रंथियों को हर महीने 18 हजार रुपये की सम्मान राशि देंगे। यह घोषणा दिल्ली में धार्मिक समुदायों को लेकर उनकी नीति को उजागर करती है। हालांकि, भाजपा ने इस घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, विशेष रूप से उस संदर्भ में जब 'आप' पहले से ही इमामों को वेतन देती आ रही है। भाजपा का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 2013 से मौलवियों को वेतन देना शुरू किया था और अब तक 58 करोड़ 30 लाख 90 हजार रुपये उन्हें दिए जा चुके हैं।


दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि जब तक उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत थी, तब तक केजरीवाल को पुजारियों और ग्रंथियों की जरूरत क्यों नहीं पड़ी, लेकिन अब जब उनकी स्थिति कमजोर हुई है, तो वे राम-राम करने लगे हैं। सचदेवा ने यह भी कहा, "जब नैया डूबने लगती है, तो राम नाम अपने आप जुबान पर आ जाता है, और यही अब अरविंद केजरीवाल के साथ हो रहा है।"

सचदेवा ने भाजपा द्वारा मंदिरों के पुजारियों और ग्रंथियों को वेतन दिए जाने की पुरानी मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछले दो सालों से इस मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार पर दबाव डाला था और इसके लिए कई धरने, प्रदर्शन और संघर्ष किए थे। सचदेवा ने यह भी दावा किया कि भाजपा और 25 हजार पुजारियों द्वारा किए गए प्रदर्शनों की तस्वीरें उन्होंने मीडिया के सामने पेश की हैं, जिससे यह साबित होता है कि भाजपा लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर सक्रिय थी।

इस विवाद ने दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ लिया है, जहां एक ओर अरविंद केजरीवाल ने धार्मिक समूहों के प्रति अपनी सहानुभूति और समर्थन दिखाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इसे राजनीतिक चाल करार दिया है। भाजपा का कहना है कि केजरीवाल का यह कदम चुनावी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि वे अब धार्मिक समुदायों के बीच समर्थन प्राप्त करने के लिए धार्मिक कार्ड खेल रहे हैं।