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उमर अब्दुल्ला को लगा दोहरा झटका, चुनावी वादे और दादा का सम्मान दोनों ही हुए नजरअंदाज

 27 May 2026

जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2025 के लिए 28 राजपत्रित छुट्टियों की एक नई सूची जारी की है, जिसमें उमर अब्दुल्ला के दादा और पार्टी के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती 5 दिसंबर को छुट्टी के रूप में शामिल नहीं की गई है। इस फैसले ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस पार्टी को तगड़ा आघात पहुंचाया है, क्योंकि यह छुट्टी उस दिन होती थी, जब पार्टी के संस्थापक की जयंती मनाई जाती थी। इसके अलावा, 13 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में भी राजपत्रित अवकाश नहीं दिया गया है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस दिन को पुनः राजपत्रित अवकाश के रूप में बहाल करने का वादा किया था। पार्टी ने 5 दिसंबर को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती को भी अवकाश के रूप में बहाल करने का संकल्प लिया था।


13 जुलाई, 1931 को डोगरा महाराजा के सैनिकों द्वारा गोलियों से शहीद हुए 23 स्वतंत्रता सेनानियों की याद में जम्मू-कश्मीर में शहीद दिवस के रूप में सार्वजनिक छुट्टी होती थी। वहीं, 5 दिसंबर को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती के उपलक्ष्य में सार्वजनिक अवकाश होता था, जो नेशनल कॉन्फ्रेंस और कश्मीर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता था। लेकिन 2019 में जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किया, उसके बाद उपराज्यपाल प्रशासन ने इन दोनों छुट्टियों को समाप्त कर दिया था। 2020 में इन छुट्टियों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया था, जिससे कश्मीर में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि, बाद में सरकार ने 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह के जन्मदिन और 26 अक्टूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर में भारतीय सैनिकों की लैंडिंग को राजपत्रित अवकाश के रूप में शामिल किया। इसे अब 'विलय दिवस' के रूप में मनाया जाने लगा है और 2025 की छुट्टियों की सूची में इसे शामिल किया गया है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के आदेश के तहत सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त सह सचिव एम. राजू ने हाल ही में छुट्टियों की सूची जारी की है, जिसमें इन छुट्टियों के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट ने 13 जुलाई और 5 दिसंबर को सार्वजनिक छुट्टियां बहाल करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को कोई प्रस्ताव भेजा था या नहीं। इस फैसले के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस और पार्टी के नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी ने सरकारी गजट में 13 जुलाई और 5 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश के रूप में शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "आज की छुट्टियों की सूची और यह निर्णय कश्मीर के इतिहास और लोकतांत्रिक संघर्ष के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) की उपेक्षा को दर्शाता है।" उन्होंने इस फैसले को कश्मीर की सांस्कृतिक और राजनीतिक धरोहर की उपेक्षा बताया।

इस बीच, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस महीने की शुरुआत में यह संकेत दिया था कि अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद हटाई गई छुट्टियों को फिर से बहाल किया जा सकता है। उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, उनकी पार्टी का यह मानना था कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती और 13 जुलाई के शहीदों की याद में छुट्टियां बहाल की जानी चाहिए। पार्टी ने इस पर जोर देते हुए कहा था कि ये छुट्टियां कश्मीर के लोगों की पहचान और संघर्ष का अहम हिस्सा हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता सादिक ने भी कहा, "हमें उम्मीद थी कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और 13 जुलाई के शहीदों की याद में छुट्टियां शामिल की जाएंगी, लेकिन ऐसा न होने से हमारा विश्वास और उम्मीद टूट गई है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि उनका महत्व या हमारी विरासत कम हो गई है। हम विश्वास रखते हैं कि एक दिन ये छुट्टियां फिर से शुरू होंगी।"

इस विवाद ने जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना दिया है, क्योंकि यह न केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय जनता पार्टी के बीच का मुद्दा है, बल्कि यह कश्मीर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ा हुआ सवाल बन गया है। इस मुद्दे पर आगे आने वाले समय में और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल सकती हैं।