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कांग्रेस में नेतृत्व संकट, निकाय चुनाव में भूपिंदर हुड्डा ही दिखाई दे रहे सबसे मजबूत!

 28 May 2026

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों को दो महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस में अभी भी संगठन और नेतृत्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने राज्य में अपनी सरकार का गठन कर लिया है और अब पार्टी ने प्रदेश संगठन में बदलाव की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। भाजपा अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए निकाय चुनावों से पहले अपने संगठन में मजबूती लाने के प्रयासों में जुटी है। वहीं, हरियाणा की कांग्रेस, जो एक फीसदी से भी कम वोट शेयर से चुनाव हार गई थी, अपने नेतृत्व की अस्थिरता और गुटबाजी के कारण गंभीर संकट से गुजर रही है। कांग्रेस ने अभी तक विपक्ष के नेता का चयन नहीं किया है, और पार्टी का नेतृत्व चयन की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।


पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान को हटाने की चर्चाएं तो जोर पकड़ रही हैं, लेकिन इस पर अभी तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है। चुनावों में हार के बाद पार्टी में आपसी आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। चुनाव प्रभारी दीपक बाबरिया ने हार के लिए टिकट वितरण को जिम्मेदार ठहराया, जबकि हुड्डा खेमे के नेता और प्रदेश अध्यक्ष उदयभान ने हाल ही में बयान दिया कि टिकटों का बंटवारा दिल्ली से ही किया गया था, न कि हरियाणा के स्थानीय नेताओं द्वारा। इस तरह के बयान पार्टी में आंतरिक संघर्ष को और बढ़ाते जा रहे हैं।

इस बीच, भूपिंदर सिंह हुड्डा, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और जिनके पास करीब दो दर्जन विधायकों का समर्थन है, ने विपक्ष के नेता बनने का दावा किया है। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान अभी तक उनके दावे पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले पाया है। पार्टी को लगता है कि यदि हुड्डा को बढ़ावा दिया गया तो इससे यह संदेश जाएगा कि वे हर हाल में समर्थन पाने वाले नेता हैं, जो पार्टी के भीतर एक विवाद का कारण बन सकता है। इसके अलावा, कुमारी सैलजा के गुट की ओर से दलितों के मुद्दे को उठा कर अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं, जो भाजपा के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में दलितों के मुद्दे को जोर शोर से उठाया था।

कांग्रेस की स्थिति यह है कि न तो पार्टी हाईकमान हुड्डा को हटाने का जोखिम उठा सकता है और न ही उन्हें और बढ़ावा देने का कोई निर्णय ले पा रहा है। इस बीच, गुटबाजी और बयानबाजी का सिलसिला लगातार जारी है। कुमारी सैलजा, भूपिंदर सिंह हुड्डा और अन्य गुट अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि भाजपा से हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए चौधरी बीरेंद्र सिंह ने भी प्रदेश अध्यक्ष उदयभान के इस्तीफे की मांग उठाई है। सैलजा गुट के समर्थक, जैसे शमशेर सिंह गोगी, ने भी साफ तौर पर आरोप लगाया कि भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंदर ने ही टिकट बंटवारे में मनमानी की थी, जिससे पार्टी की हार हुई। इस बयानबाजी से कांग्रेस के अंदर असंतोष और गहराता जा रहा है, और हर गुट अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस के अंदर कई जिलों के प्रभारी बदल दिए गए हैं, और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सैलजा गुट के कई लोग प्रदेश अध्यक्ष बनने की मंशा रखते हैं, जबकि हाईकमान अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।

हरियाणा कांग्रेस की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि पार्टी के अंदर नेतृत्व के चुनाव को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिख रही है। गुटबाजी, आपसी आरोप-प्रत्यारोप और हाईकमान की कमजोरी ने पार्टी के अंदर असंतोष को बढ़ा दिया है, जो निकाय चुनावों में कांग्रेस की चुनौती को और भी कठिन बना सकता है।