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FarmerProtest: पंजाब में किसानों का रेल रोको अभियान, सुनसान सड़के, पंजाब बंद का असर

 29 May 2026

पंजाब में किसानों द्वारा बुलाए गए बंद का असर व्यापक रूप से महसूस किया जा रहा है। जबकि चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में इसका प्रभाव थोड़ा कम दिखाई दे रहा है, वहीं जालंधर, लुधियाना, पठानकोट, मोहाली, होशियारपुर और बठिंडा जैसे प्रमुख शहरों में बाजार पूरी तरह से बंद हैं। इन इलाकों में स्थिति यह है कि सड़कों पर कोई वाहन नहीं दिख रहा है और रेलवे स्टेशन भी सुनसान पड़े हैं। किसानों ने रेल रोको अभियान भी शुरू किया है, जिसके कारण पंजाब होकर चलने वाली कुल 221 ट्रेनों को सोमवार को रद्द कर दिया गया है। इन ट्रेनों में से कई ट्रेनें जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे दूरस्थ राज्यों के लिए भी चलती हैं। इसके अलावा, शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत जैसी प्रमुख लंबी दूरी की ट्रेनों को भी रद्द कर दिया गया है। पंजाब में केवल आपातकालीन सेवाओं का संचालन हो रहा है, जबकि सामान्य स्थिति की उम्मीद शाम 4 बजे के बाद जताई जा रही है। यह समयसीमा किसानों के द्वारा तय की गई है, क्योंकि उन्होंने बंद का ऐलान शाम 4 बजे तक के लिए किया है।


प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने भी इस बंद का समर्थन किया है, जिसके कारण सड़कों पर आवाजाही में कमी आ गई है। इसके साथ ही, रेलवे स्टेशनों पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि अधिकतर ट्रेनें रद्द हो गई हैं। यह बंद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की भूख हड़ताल के समर्थन में किया गया है, जो कई दिनों से अनशन पर हैं और अब उनकी तबीयत भी गंभीर हो गई है। डल्लेवाल का कहना है कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के कानून को लागू करना चाहिए, और जब तक इस कानून के बारे में कोई घोषणा नहीं की जाती, वे अपना अनशन जारी रखेंगे। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह डल्लेवाल को जबरदस्ती ही सही, अस्पताल ले जाकर उनका इलाज कराए, ताकि उनकी जान को कोई खतरा न हो। डल्लेवाल ने भूख हड़ताल शुरू करने के बाद अब तक एक महीने से भी अधिक समय बिता लिया है और उनकी स्थिति गंभीर होती जा रही है।

पंजाब के ज्यादातर नेशनल हाईवे पर आज सुबह से ही सन्नाटा पसरा हुआ है। सड़कें सुनसान हैं और वाहन बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग आज अपने कार्यालयों और स्कूलों में भी नहीं गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बंद का असर काफी गहरा है। दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल की ओर जाने वाले निजी वाहनों के अलावा, बाकी रास्तों पर कोई खास गतिविधि नहीं दिख रही है। शहरों के प्रमुख रास्तों पर भी बहुत कम वाहन हैं। किसान संगठन के प्रतिनिधि सुबह-सुबह अपने-अपने क्षेत्रों में निकलकर दुकानों को बंद करा रहे हैं और व्यापारिक गतिविधियों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इस बंद का असर खासतौर पर उन जिलों में अधिक देखा जा रहा है, जहां ग्रामीण क्षेत्र प्रमुख हैं, जैसे फिरोजपुर, बठिंडा, होशियारपुर, मोगा और पटियाला। इन इलाकों में दुकानें, स्कूल और दफ्तरों तक में छुट्टियां घोषित की गई हैं, जिससे यह साबित होता है कि लोग इस बंद को एकजुटता के साथ समर्थन दे रहे हैं।

आज डल्लेवाल के अनशन का 35वां दिन है और इस दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। रविवार शाम को पंजाब पुलिस के पूर्व अधिकारी जसकरण सिंह के नेतृत्व में एक डेलिगेशन ने डल्लेवाल से मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल ने डल्लेवाल को अनशन तोड़ने के लिए राजी करने की कोशिश की, लेकिन वे इस प्रयास में सफल नहीं हो पाए। इस बंद का नेतृत्व किसान नेता सरवन सिंह पंढेर कर रहे हैं, और इस आंदोलन को हरियाणा की खाप पंचायतों का भी समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, यह आंदोलन उन किसानों के अधिकारों की मांग कर रहा है, जिन्हें पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी चाहिए और जो लंबे समय से सरकार से इस बारे में कानून बनाने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

इस बंद और अनशन ने राज्य और देश भर में किसानों के मुद्दों को फिर से प्रमुखता से उठाया है और इसने राजनीतिक और सामाजिक ध्यान आकर्षित किया है। किसानों के इस आंदोलन का प्रभाव न केवल पंजाब, बल्कि अन्य राज्यों में भी महसूस किया जा रहा है, और यह आंदोलन सरकार से अपने अधिकारों के लिए लड़ने की किसानों की दृढ़ इच्छा का प्रतीक बन चुका है।