Article

H-1B वीजा कार्यक्रम पर एलन मस्क ने फिर उठाए सवाल, कहा- सुधार जरूरी

 29 May 2026

एच-1 बी वीजा कार्यक्रम पर अरबपति टेक दिग्गज एलन मस्क ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह प्रणाली अव्यवस्थित है और इसमें बड़े सुधार की आवश्यकता है। मस्क और भारतीय मूल के राजनेता विवेक रामास्वामी दोनों ही एच-1 बी वीजा के समर्थन में लगातार आवाज़ उठा रहे हैं, और इस मुद्दे पर वे डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों से भी भिड़ चुके हैं।  


मस्क ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि एच-1 बी वीजा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। एक उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की थी कि अमेरिका को विश्वभर की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का गंतव्य बनना चाहिए, लेकिन एच-1 बी वीजा कार्यक्रम इस उद्देश्य को पूरा करने का सही तरीका नहीं है। इसके जवाब में मस्क ने सुझाव दिया कि एच-1 बी वीजा प्रणाली में न्यूनतम वेतन बढ़ाने और वार्षिक आवश्यक लागत जोड़ने से सुधार हो सकता है, जिससे विदेशों से कर्मचारियों को लाना घरेलू भर्ती की तुलना में महंगा हो जाएगा।

पिछले सप्ताह मस्क ने कहा था कि अमेरिका में उच्च प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका को तरक्की करनी है तो विदेशों से कुशल कर्मचारियों को लाना जरूरी है। इस मुद्दे पर भारतीय मूल के राजनेता विवेक रामास्वामी ने मस्क का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका की संस्कृति लंबे समय से उत्कृष्टता की बजाय औसत को महत्व देती है।

कैसे शुरू हुआ एच-1 बी वीजा विवाद


एच-1 बी वीजा विवाद के केंद्र में एक नियुक्ति है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आने वाली सरकार में किया था। यह नियुक्ति भारतवंशी श्रीराम कृष्णन की थी, जिन्हें ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों का सलाहकार बनाया है। कृष्णन की नियुक्ति से ट्रंप के अतिवादी समर्थक नाराज हो गए, खासकर उनकी उस टिप्पणी से जिसमें उन्होंने योग्य विदेशी कामगारों के लिए वर्क वीजा और ग्रीन कार्ड की वकालत की थी। एक अतिवादी समर्थक लॉरा लूमर ने इस नियुक्ति की आलोचना करते हुए कहा कि यह ट्रंप की आव्रजन नीतियों के खिलाफ है।

एलन मस्क ने इस विवाद पर उलट विचार व्यक्त किए। मस्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि अमेरिका में बेहतरीन इंजीनियरिंग टैलेंट की कमी रही है, जिससे सिलिकॉन वैली को नुकसान हो सकता है। उन्होंने आगे कहा, "क्या आप अमेरिका को जीतते देखना चाहते हैं, या आप अमेरिका को हारते देखना चाहते हैं? अगर आप दुनिया के बेहतरीन दिमागों को दूसरे देशों में खेलने देंगे, तो अमेरिका हार जाएगा।" मस्क ने यह भी कहा कि टेक कंपनियां अक्सर विदेशों में जन्मे इंजीनियरों को भर्ती करती हैं, और इसका कारण यह नहीं है कि अमेरिका में बुद्धिमता की कमी है, बल्कि अमेरिका में ऐसी संस्कृति विकसित हो गई है, जिसमें मैथ्स ओलंपियाड चैंपियन को प्रॉम क्वीन से कम महत्व दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपनी प्रतिभाओं को अन्य देशों से आकर्षित नहीं करेगा, तो चीन जैसी प्रतिस्पर्धी ताकतों से पिछड़ सकता है।

Read This Also:- America: H-1B वीजा पर बर्नी सैंडर्स और एलन मस्क के बीच भिड़ंत, सस्ते श्रमिकों के मुद्दे पर विवाद