नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर डॉ. मनमोहन सिंह का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत के महान सपूत और सिख समुदाय के पहले प्रधानमंत्री का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर कराना उनके योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है। राहुल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "मनमोहन सिंह जी एक दशक तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में भारत आर्थिक महाशक्ति बना। आज उनकी नीतियां गरीबों और पिछड़ों के लिए एक सहारा बनी हुई हैं। उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए था।"
कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि जहां मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार हुआ, वहीं पर उनका स्मारक बनाया जाना चाहिए। सरकार की ओर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि एक उपयुक्त स्थान खोजने के बाद स्मारक का निर्माण किया जाएगा। सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीति करने की कोशिश बताया। सरकार का कहना है कि सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को उचित सम्मान दिया गया है और डॉ. मनमोहन सिंह के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राहुल गांधी की अपील
राहुल ने सरकार से आग्रह किया कि वह डॉ. मनमोहन सिंह जैसे महान नेता की गरिमा का सम्मान करें। उन्होंने कहा, "अब तक सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के अंतिम संस्कार उनके अधिकृत समाधि स्थलों पर हुए हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि देश का हर नागरिक बिना किसी बाधा के उन्हें श्रद्धांजलि दे सके। डॉ. मनमोहन सिंह भी इस सम्मान के पात्र हैं।"
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के पहले सिख प्रधानमंत्री को इस तरह अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने इसे सिख समुदाय के प्रति असम्मान करार दिया। वहीं, केंद्र सरकार ने कांग्रेस से आग्रह किया है कि इस विषय को राजनीति का मुद्दा न बनाया जाए और डॉ. मनमोहन सिंह की स्मृति को विवादों से अलग रखा जाए।
यह विवाद पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान के मुद्दे को लेकर राजनीति के नए मोर्चे को खोलता नजर आ रहा है।
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