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दुनिया में भूख के बढ़ते स्तर के बीच मानवीय सहायता में भी कमी

 04 Jun 2026

दुनिया में भुखमरी और संघर्ष बढ़ते जा रहे हैं, जबकि अमीर देशों से संयुक्त राष्ट्र को मिलने वाली मानवीय सहायता में गिरावट आई है। इससे राहत एजेंसियों को भूख से पीड़ित लोगों तक मदद पहुंचाने में मुश्किल फैसले लेने पड़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 2025 तक करीब 11.7 करोड़ लोग सही समय पर सहायता से वंचित रह सकते हैं।


मानवीय सहायता की जरूरत बढ़ी, लेकिन फंड की कमी के कारण मदद पहुंचाना मुश्किल 
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2025 तक 30.7 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी, लेकिन उपलब्ध फंड के कारण केवल 60% जरूरतमंदों तक ही मदद पहुंचाई जा सकेगी। इसका परिणाम यह होगा कि लाखों लोग, जिनमें बच्चों और महिलाओं की बड़ी संख्या होगी, मदद से वंचित रह जाएंगे।

संयुक्त राष्ट्र को फंड की कमी का सामना, राहत एजेंसियां जरूरी मदद देने में सक्षम नहीं 
2024 में भी हालात खराब थे, जब संयुक्त राष्ट्र ने 49.6 अरब डॉलर की मानवीय सहायता के लिए अपील की, लेकिन उसे सिर्फ 46% फंड ही मिल सका। इससे राहत एजेंसियों को राशन घटाने और सहायता प्राप्त करने योग्य लोगों की संख्या कम करने पर मजबूर होना पड़ा।

डब्ल्यूएफपी की चिंता: भुखमरी से जूझ रहे लोगों को कम भोजन मिल पा रहा है
 वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) की असिस्टेंट एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रानिया डागाश-कमारा ने बताया कि फंड की कमी के कारण डब्ल्यूएफपी ने सीरिया में 60 लाख लोगों तक भोजन पहुंचाने का लक्ष्य घटाकर 10 लाख कर दिया है। यह स्थिति बताती है कि राहत कार्यों को जारी रखने के लिए संसाधनों की कमी हो रही है।

जर्मनी और अमेरिका से झटका, चीन और भारत का योगदान कम 
जर्मनी ने 2023-2024 के बीच 50 करोड़ डॉलर की कटौती की और 2025 के लिए एक अरब डॉलर कम करने की योजना बनाई है। अमेरिका के बारे में भी चिंता है कि उनका नया प्रशासन विदेशी सहायता में कटौती कर सकता है। इसके विपरीत, चीन और भारत ने मानवीय सहायता में बहुत कम योगदान दिया है।

मानवीय संकट और संघर्ष: सहायता में देरी का गंभीर प्रभाव 
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता भूख के प्रमुख कारण हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मदद की जरूरतों में इजाफा हो रहा है, लेकिन सहायता पहुंचाने में बाधाएं आ रही हैं। ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की निदेशक जूलिया स्टेट्स के अनुसार, "सहायता तब आती है जब जानवर मर चुके होते हैं, लोग पलायन कर रहे होते हैं और बच्चे कुपोषण का शिकार हो चुके होते हैं।"

संयुक्त राष्ट्र की अपील: नए दानकर्ताओं की तलाश 
संयुक्त राष्ट्र अब अपने दानकर्ताओं के आधार को विस्तारित करने की कोशिश कर रहा है। प्रवक्ता येन्स लार्के ने कहा, "हमें सिर्फ उन्हीं दानियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए जो बार-बार मदद करते हैं। हमें नए दानकर्ताओं की जरूरत है ताकि मानवीय संकटों का समाधान किया जा सके।"

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