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Hathras: कृतार्थ हत्याकांड के आरोपी ने बदला अपना बयान, कहा- ‘पुलिस के उत्पीड़न का डर था!’

 05 Jun 2026

हाथरस के कृतार्थ हत्याकांड में विवेचक ने अलीगढ़ जिला कारागार में जाकर अभियुक्तों के बयान फिर से दर्ज किए। स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पहले पूर्व विवेचक को जो बयान दिया था, वह पूरी तरह से गलत था। वह उस समय अत्यधिक भयभीत थे और उन्हें यह डर था कि यदि उन्होंने सही बयान दिया तो पुलिस उनका उत्पीड़न कर सकती है और मारपीट कर सकती है।


दिनेश बघेल ने आगे बताया कि पुलिस ने उन्हें यह समझाया था कि यदि वह घटना को स्वीकार कर लें, तो पुलिस उनसे कड़ी पूछताछ नहीं करेगी और जेल भेज देगी। इस दबाव के कारण उन्होंने और अन्य अभियुक्तों ने आपस में मिलकर घटना स्वीकार कर ली थी। लेकिन जब उन्होंने फिर से अपना बयान दिया, तो उन्होंने बताया कि जब वह स्कूल के हॉस्टल में पहुंचे, तो कृतार्थ का शव पड़ा हुआ था। उन्होंने कृतार्थ की धड़कन और नब्ज चेक की थी, लेकिन न तो उसकी धड़कनें चल रही थीं और न ही नब्ज महसूस हो रही थी, उसका शरीर ठंडा हो चुका था। इस स्थिति में उनके मन में यह ख्याल आया कि अगर वह कृतार्थ को अस्पताल ले जाते, तो यह उनके बचाव में आता। इसके बाद, उन्होंने इसे अस्पताल ले जाने का विचार किया था, लेकिन पुलिस को सूचना देने से बचने के कारण वह इसे अस्पताल नहीं ले गए और न ही पुलिस को सूचित किया।

उन्होंने यह भी कहा कि कृतार्थ की मृत्यु स्कूल के हॉस्टल में हुई थी, और वह स्कूल के प्रबंधक थे। साथ ही, स्कूल ने आवासीय विद्यालय संचालन के लिए वैध अनुमति भी नहीं ली थी, और न ही इस बारे में शिक्षा विभाग को सूचित किया था। इसी कारण उन्होंने पुलिस और अन्य अधिकारियों को सूचना देने का निर्णय नहीं लिया। दिनेश बघेल ने आगे यह बताया कि कृतार्थ की मृत्यु के बाद, उन्होंने और उनके सहयोगियों ने इस स्थिति से बचने के उपायों पर विचार किया। उन्होंने अपने पिता जसोदन सिंह, प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह, शिक्षक रामप्रकाश सोलंकी और वीरपाल के साथ मिलकर यह योजना बनाई कि कृतार्थ के परिवामामले के अनुसार, कृतार्थ का शव 23 सितंबर को डीएल पब्लिक स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल की कार से सादाबाद में मिला था। कृतार्थ स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। पुलिस ने 26 सितंबर को स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल, शिक्षक रामप्रकाश सोलंकी, प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह, वीरपाल सिंह और जसोदन सिंह को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप नहीं बनते, बल्कि आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य को मिटाने और जानकारी न देने का आरोप है। इस पूरी घटनाक्रम की पुनः विवेचना की गई और सभी अभियुक्तों के बयान फिर से दर्ज किए गए। इसके अलावा, बच्चों के बयान भी लिए गए और सीसीटीवी फुटेज का भी परीक्षण किया गया। इस सबकी जांच के बाद नए तथ्य सामने आए। न्यायालय ने इस मामले की गहराई से जांच की और पाया कि पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार थे। पुलिस के खिलाफ किसी भी प्रकार का दोष नहीं पाया गया।र को यह बताया जाएगा कि उसकी मृत्यु बुखार से हुई थी। उनका उद्देश्य यह था कि कृतार्थ के परिजनों को यह विश्वास दिलाया जाए कि उन्होंने बच्चे का इलाज करने की पूरी कोशिश की, ताकि परिवार वाले शव का अंतिम संस्कार कर दें और फिर वह लोग बच जाएं।

गौरतलब है कि कृतार्थ की हत्या के बाद पुलिस ने मामले में कई बार दिशा बदली है। पहले पुलिस ने इस घटना को तंत्र-मंत्र के तहत हत्या करने का मामला बताया था, लेकिन बाद में पुलिस ने इस मामले में बदलाव करते हुए कक्षा आठ के एक छात्र को हत्या का आरोपी ठहराया है। पुलिस का कहना है कि इस छात्र ने कृतार्थ की हत्या स्कूल में छुट्टी लेने के लिए की थी, ताकि वह स्कूल से छुट्टी लेकर घर जा सके। इस मामले में पुलिस ने 23 दिसंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार त्रिपाठी के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें पूर्व में गिरफ्तार किए गए स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल समेत पांच आरोपियों पर हत्या और आपराधिक साजिश की धाराएं हटा दी गईं। उन्हें अब साक्ष्य मिटाने और पुलिस को सूचना न देने के आरोप में आरोपित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, इन सभी आरोपियों को जमानत मिल गई है।

मामले के अनुसार, कृतार्थ का शव 23 सितंबर को डीएल पब्लिक स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल की कार से सादाबाद में मिला था। कृतार्थ स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। पुलिस ने 26 सितंबर को स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल, शिक्षक रामप्रकाश सोलंकी, प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह, वीरपाल सिंह और जसोदन सिंह को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप नहीं बनते, बल्कि आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य को मिटाने और जानकारी न देने का आरोप है। इस पूरी घटनाक्रम की पुनः विवेचना की गई और सभी अभियुक्तों के बयान फिर से दर्ज किए गए। इसके अलावा, बच्चों के बयान भी लिए गए और सीसीटीवी फुटेज का भी परीक्षण किया गया। इस सबकी जांच के बाद नए तथ्य सामने आए। न्यायालय ने इस मामले की गहराई से जांच की और पाया कि पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार थे। पुलिस के खिलाफ किसी भी प्रकार का दोष नहीं पाया गया।

इस मामले में पीड़ित परिवार आगे न्यायालय की शरण भी ले सकता है, अगर उन्हें लगता है कि इस मामले में न्याय नहीं मिला है। न्यायालय ने इस मामले में पुलिस द्वारा किए गए कार्यों को सही ठहराया और मामले की पूरी जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य के आधार पर उचित कार्रवाई की।