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"मनमोहन सिंह की नीतियों से मुसलमानों को मिला बल", ओवैसी का शोक संदेश

 05 Jun 2026

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में गुरुवार (26 दिसंबर) को नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गुरुवार शाम को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने रात 9:51 बजे अंतिम सांस ली। 2004 से 2014 तक दो बार प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। हर कोई अपने-अपने तरीके से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।


 मनमोहन सिंह के योगदान को ओवैसी ने सराहा


ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने मनमोहन सिंह को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जिन्होंने अल्पसंख्यकों और हाशिए पर पड़े वर्गों के उत्थान के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। 

ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मैं हमेशा ऐसे नेता के रूप में याद करूंगा, जिन्होंने अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों सहित हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के लिए ईमानदारी से प्रयास किए। उनके जीवन की कहानी, जिसने विभाजन की पीड़ा झेली और साधारण पृष्ठभूमि से उठकर आरबीआई गवर्नर, वित्त मंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय किया, बेहद प्रेरक है। उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के प्रति मेरी संवेदनाएं।”

मुसलमानों के उत्थान पर दिया जोर


ओवैसी ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने मुसलमानों और अन्य वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए गंभीरता से काम किया। उनके कार्यकाल को अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाएगा।  डॉ. मनमोहन सिंह को भारत के आर्थिक सुधारों का जनक माना जाता है। उनके नेतृत्व में देश ने न केवल आर्थिक संकटों से उबरने में कामयाबी पाई, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उनके निधन से देश ने एक दूरदर्शी नेता खो दिया है।

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