Article

शेख हसीना को वापस बांग्लादेश नहीं भेजेगा भारत - सूत्र

 15 Jun 2026

मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से शेख हसीना को उनके देश वापस भेजने की मांग की है। शेख हसीना, जो बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री हैं, इस समय भारत में हैं। उन्हें 5 अगस्त को बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद वायुसेना के हेलिकॉप्टर से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस लाया गया था, और तब से वह दिल्ली में किसी स्थान पर रह रही हैं। बांग्लादेश सरकार ने हाल ही में शेख हसीना को भारत से वापस भेजने के लिए एक डिप्लोमैटिक नोट भेजा है, लेकिन भारत सरकार ने अब तक इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत शेख हसीना को वापस भेजने के विचार से दूर है और बांग्लादेश के द्वारा दबाव बनाने के बावजूद ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि में किसी राजनीतिक व्यक्ति की वापसी का प्रावधान नहीं है। इसके अतिरिक्त, भारत भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह कदम नहीं उठाना चाहता। भारत को यह विश्वास है कि यदि राजनीतिक स्थिति में बदलाव आता है और शेख हसीना को फिर से सत्ता मिलती है, तो वह रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने डिप्लोमैटिक नोट भेजने के अलावा भारत पर कोई अन्य दबाव बनाने का विकल्प नहीं छोड़ा है। शेख हसीना ने पहले भी भारत में समय बिताया है, और उनके परिवार के सदस्य भी भारत में रहे हैं, जिससे यह भी संभव है कि बांग्लादेश से बाहर जाने के बाद उनके लिए भारत में आना सबसे सहज रास्ता था। इसके अलावा, भारत में रहते हुए शेख हसीना के लिए बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करना भी आसान होगा, क्योंकि यहां उनके समर्थन में व्यापक जनमत और उनके प्रभाव को समझा जाता है।

भारत शेख हसीना की महत्व को पूरी तरह से समझता है, क्योंकि उनके 15 साल के शासनकाल के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों पर काबू पाया था और सीमा से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्वक हल किया था। इस दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी काफी बढ़ा था, जो दोनों देशों के बीच सामरिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करता है। भारत के लिए शेख हसीना की भूमिका और उनकी रणनीतिक अहमियत को देखते हुए, यह संभावना जताई जा रही है कि भारत शायद इस मामले पर अधिक समय ले सकता है और यह कह सकता है कि वह प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार करेगा। भारत की परंपरा रही है कि वह अपने मेहमानों का सम्मान करता है और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, भारत ने दलाई लामा को भी भारत आने का अवसर दिया और आज भी वह हजारों तिब्बतियों के साथ भारत में रह रहे हैं। शेख हसीना की स्थिति में भी, यह उम्मीद की जा सकती है कि भारत उन्हें आश्रय देने में सक्षम होगा, खासकर जब उनकी भूमिका बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण रही है।

हालांकि, शेख हसीना की वापसी का मामला कुछ समय ले सकता है, लेकिन यह संभव है कि भविष्य में, जब राजनीतिक स्थिति अनुकूल हो, तो शेख हसीना एक दिन बांग्लादेश लौट सकती हैं। भारत को यह उम्मीद है कि शेख हसीना की वापसी से दोनों देशों के रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे, और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पुनः स्थापित करने में भी मदद मिल सकती है।