मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री ने किया शिक्षा व्यवस्था का भांडाफोड़, कहा- ‘शिक्षक, किराये के लोगों से पढ़वा रहे!,
17 Jun 2026
मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा और परिवहन मंत्री, उदय प्रताप सिंह, ने हाल ही में एक चौंकाने वाला बयान दिया, जिसने न केवल सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में कुछ सरकारी शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए दूसरों को किराए पर काम पर रख रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि वे 500 ऐसे शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, जो स्कूलों में पढ़ाने नहीं जाते और इसके बदले वे अपना काम करने के लिए दूसरों को नौकरी पर रख लेते हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि इनमें से 100 शिक्षक उनके जिले के हैं।
यह बयान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर रायसेन जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। इस कार्यक्रम में मंत्री ने शिक्षकों के बीच कहा, "मैंने 500 शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से जाना है जो स्कूल नहीं जाते और जिनसे काम करने के लिए अन्य लोगों को किराए पर लिया गया है। इनमें से 100 तो मेरे जिले में ही होंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि इस स्थिति को सुधारने के लिए समाज को गहराई से सोचने की जरूरत है क्योंकि जब हम असल समस्याओं की बात करते हैं, तो लोगों का ध्यान कम ही जाता है, जबकि विरोध करने वाले अक्सर ज्यादा सुर्खियां बटोरते हैं।
मंत्री ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि राज्य सरकार के लिए संसाधनों के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, "हमें अपने कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और वल्लभ भवन से जुड़े लोगों की मदद से यह सुनिश्चित करना होगा कि सीमित संसाधनों का इस्तेमाल सर्वोत्तम तरीके से किया जाए। यह काफी बड़ी चुनौती है।" इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए और अधिक समन्वय की आवश्यकता है, लेकिन इस दिशा में सरकार ने अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
मंत्री के इस बयान से साफ है कि राज्य में सरकारी स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है। कई शिक्षक अपने कर्तव्यों से भाग रहे हैं, और इसके परिणामस्वरूप बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना मुश्किल हो रहा है। यह एक गंभीर संकेत है कि राज्य सरकार और प्रशासन को अपनी शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है। खासतौर पर तब, जब सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आई है।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस स्थिति को ठीक करने के लिए हमें कड़े कदम उठाने होंगे, लेकिन उन्होंने सरकार की बेबसी को स्वीकार करते हुए कहा कि यह एक कठिन काम है। उनके बयान से यह भी जाहिर होता है कि राज्य सरकार अपनी व्यवस्था को सुधारने के लिए इच्छुक तो है, लेकिन उसे सही दिशा में कार्य करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दबावों का सामना करना पड़ता है।
उदय प्रताप सिंह के इस बयान को राजनीतिक हलकों में भी गहरी प्रतिक्रिया मिली है। कुछ ने इसे राज्य सरकार की नाकामी के रूप में देखा, तो कुछ ने इसे शिक्षा व्यवस्था में गहरी जड़ों तक पहुंची समस्याओं को उजागर करने वाला कदम माना। यह भी देखा गया कि मंत्री ने जिन मुद्दों को उठाया है, वे सही हैं, लेकिन जिन समस्याओं का उल्लेख किया है, उनका समाधान आसान नहीं है और इसके लिए ठोस योजनाएं और निष्पक्ष क्रियावली की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, उदय प्रताप सिंह का यह बयान शिक्षा व्यवस्था की कई गंभीर कमियों को उजागर करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या वे वास्तविक बदलाव लाने में सक्षम होती है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरे।