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साहिबजादों का साहस, बलिदान भारत के लोकतंत्र की पहचान: PM मोदी
19 Jun 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर बाल दिवस के अवसर पर साहिबजादों के अद्वितीय साहस और बलिदान को भारत के मजबूत लोकतंत्र का आधार बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने साहिबजादों के बलिदान को नमन किया और इस दिन को साहिबजादों की वीरता और उनके बलिदान की स्मृति के रूप में मनाने की सरकार की पहल पर प्रकाश डाला।
साहिबजादों के बलिदान को भारत का गौरव बताया
पीएम मोदी ने कहा, "साहिबजादों का साहस और बलिदान भारत के लोकतंत्र की नींव हैं। वीर बाल दिवस हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, देश और उसके हित सर्वोपरि हैं।" उन्होंने साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह की वीरता और उनकी बलिदान गाथा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुगल साम्राज्य के अत्याचारों का सामना किया और अपने धर्म और कर्तव्य के प्रति अडिग रहे।
राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं को दी बधाई
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया और उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा, "आज हमारे देश के 17 बच्चे बहादुरी, नवाचार, विज्ञान, खेल और कला जैसे क्षेत्रों में पुरस्कृत हो रहे हैं। यह हमारे युवाओं की असीम क्षमताओं और उज्जवल भविष्य का प्रमाण है। मैं इन बच्चों और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई देता हूं।" पीएम मोदी ने युवाओं की भूमिका को भारत के विकास में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, "भारत के युवा स्टार्टअप, विज्ञान, खेल और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में क्रांति ला रहे हैं। देश के लिए जीने वाला हर बच्चा और युवा 'वीर बालक' है। इस वर्ष का वीर बाल दिवस और भी खास है क्योंकि यह हमारे संविधान के निर्माण के 75वें वर्ष से जुड़ा है।"
राष्ट्रपति ने भी किया सम्मानित
इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में सात श्रेणियों में 17 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किए। इन बच्चों ने विज्ञान, नवाचार, खेल और कला के क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 में घोषणा की थी कि साहिबजादों के साहस और उनके न्याय की खोज को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' मनाया जाएगा। इस दिन का उद्देश्य साहिबजादों की वीरता और उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना और उन्हें प्रेरणा देना है।
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