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"मंदिर-मस्जिद विवाद पर मोहन भागवत के बयान से अलग है RSS मुखपत्र का विचार"

 19 Jun 2026

हाल ही में देश में मस्जिदों से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा बढ़ी है। मस्जिदों के सर्वे की मांग के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने इस मुद्दे को उठाना अस्वीकार्य बताया था। हालांकि, आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र में प्रकाशित एक संपादकीय इससे बिल्कुल विपरीत नज़र आता है। मुखपत्र में संभल मस्जिद विवाद पर एक कवर स्टोरी प्रकाशित की गई है, जिसमें कहा गया है कि विवादित धार्मिक स्थलों और संरचनाओं का वास्तविक इतिहास जानना आवश्यक है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि जिन धार्मिक स्थलों पर आक्रमण किया गया या जो ध्वस्त किए गए, उनकी सच्चाई को जानना सभ्यतागत न्याय के समान है।


लेख में यह तर्क दिया गया है कि भारत के मुस्लिम समुदाय के लिए यह जरूरी है कि वह आक्रांताओं द्वारा हिंदुओं के साथ किए गए ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार करें। संपादकीय में कहा गया कि सोमनाथ से लेकर संभल तक और उससे आगे के तथ्यों को जानने की यह लड़ाई धार्मिक श्रेष्ठता से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय पहचान को प्रमाणित करने और सभ्यतागत न्याय को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है।

आरएसएस मुखपत्र के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक कटुता और असामंजस्य को समाप्त करने के लिए एक समान दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने बाबासाहेब आंबेडकर का उदाहरण दिया, जिन्होंने जाति आधारित भेदभाव के कारणों को समझा और उसे खत्म करने के संवैधानिक उपाय दिए। उनका कहना था कि यह तभी संभव है जब मुसलमान सच्चाई को स्वीकार करें।

इससे पहले, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मस्जिदों के सर्वे की बढ़ती मांग पर चिंता जताई थी और इसे अस्वीकार्य बताया था। पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर हिंदुओं के आस्था का विषय था, लेकिन रोजाना नए विवादों को उठाना ठीक नहीं है।

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