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मोबाइल-लैपटॉप जब्ती पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ED को साक्ष्य जुटाने के नए तरीके ढूंढने होंगे

 25 Jun 2026

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को झटका देते हुए आदेश दिया है कि वह नागरिकों के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों तक न तो पहुंच बना सकती है और न ही उनकी सामग्री की कॉपी कर सकती है। यह फैसला लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के मामले में दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से ईडी की जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आ सकता है और भविष्य में अन्य मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है।


क्या है पूरा मामला? 


सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सैंटियागो मार्टिन के मामले में दिया है। ईडी ने नवंबर में मार्टिन, उनके रिश्तेदारों और कर्मचारियों पर छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे। यह छापेमारी मेघालय पुलिस की शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसमें आरोप था कि फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने लॉटरी व्यवसाय में अनियमितताएं की हैं। तलाशी के दौरान 12.41 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। फ्यूचर गेमिंग कंपनी, जो इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे बड़े राजनीतिक चंदा देने वालों में से एक रही है, ने विभिन्न राजनीतिक दलों को चंदा दिया था। इनमें तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, वाईएसआर कांग्रेस और भाजपा शामिल हैं।

निजता के अधिकार पर सवाल


सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि डिजिटल उपकरणों पर मौजूद जानकारी व्यक्ति के जीवन की सबसे व्यक्तिगत और अंतरंग होती है। याचिका में कहा गया कि ईडी द्वारा उपकरणों को जब्त करना मौलिक अधिकारों और निजता के अधिकार का उल्लंघन है।  जस्टिस अभय एस. ओका और पंकज मित्तल की पीठ ने आदेश दिया कि ईडी सैंटियागो मार्टिन के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों तक न तो पहुंच बना सकती है और न ही उनकी सामग्री की कॉपी कर सकती है। इसके अलावा, ईडी द्वारा पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत जारी समन पर भी रोक लगा दी गई है।

ईडी की प्रतिक्रिया


ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस आदेश को बड़ा झटका मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके पास मार्टिन के खिलाफ अन्य ठोस सबूत हैं। उन्होंने बताया कि वे सीबीआई मैनुअल के दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं और हाल ही में फ्यूचर गेमिंग समूह से जुड़ी 622 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।  याचिकाकर्ताओं की वकील रोहिणी मूसा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय मौलिक अधिकारों और निजता की रक्षा करने में मददगार साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईडी को इस आदेश के तहत "फिशिंग अभियान" करने से रोका जाएगा।

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