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U.K ने खारिज़ किया ‘खालिस्तानी आतंकी’ पर भारत का दावा, कहा- ऐसा कोई ‘सैनिक’ नहीं

 25 Jun 2026

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि " जगजीत सिंह नाम का कोई भी व्यक्ति ब्रिटिश सेना में सेवा नहीं दे रहा है। भारतीय अधिकारियों ने इस संबंध में हमसे कोई संपर्क नहीं किया है।" मंत्रालय के प्रवक्ता रियान शिल्लाबीर ने पंजाब पुलिस द्वारा जारी की गई एक तस्वीर पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह तस्वीर किसी अन्य ब्रिटिश सिख सैनिक की है, जिसका नाम जगजीत सिंह से मेल नहीं खाता। हालांकि, पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने अपनी जांच का बचाव करते हुए कहा, "हमारी जानकारी गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ और गहन जांच के दौरान प्राप्त हुई है। इस मामले को ब्रिटिश अधिकारियों के साथ उचित चैनलों के माध्यम से उठाया जाएगा।"


हाल ही में पंजाब पुलिस ने खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जिसके दौरान एक ब्रिटिश सिख सैनिक के बारे में जानकारी मिली, जिसे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के प्रमुख रणजीत सिंह नीता द्वारा नियंत्रित आतंकी मॉड्यूल से जोड़ा गया है। पुलिस का मानना है कि इस सैनिक का हाथ राज्य में पुलिस थानों पर हाल ही में हुए ग्रेनेड हमलों में हो सकता है। ब्रिटिश सेना के सैनिक जगजीत सिंह पर आतंकवाद में संलिप्तता के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस नाम का कोई व्यक्ति ब्रिटिश सेना में नहीं है। वहीं, पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने अपनी जांच का बचाव करते हुए कहा कि इस मामले को ब्रिटिश अधिकारियों के साथ उचित तरीके से उठाया जाएगा।

पंजाब पुलिस के डोजियर के अनुसार, जगजीत सिंह और उसके सहयोगी पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए धार्मिक नेताओं को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। पुलिस का आरोप है कि वे युवाओं को पैसा और विदेश में पलायन का लालच देकर आतंकवादी गतिविधियों में भर्ती कर रहे थे। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया गया और जगजीत सिंह को वांछित अपराधी घोषित किया गया। 2021 में, उसका नाम तब सामने आया जब तरनतारन जिले के सोहल गांव के रहने वाले रंजीत सिंह से दो हथगोले और दो पिस्तौल बरामद हुए थे, जिसके बाद अमृतसर के एसएसओसी थाने में शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस ने जानकारी दी कि हाल के महीनों में पंजाब में पुलिस चौकियों और अन्य स्थानों पर कई ग्रेनेड और आईईडी हमले हुए हैं, जिनका दावा खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के प्रमुख रणजीत सिंह नीता और "सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस यूनिट" के सदस्य फतेह सिंह बागी ने सोशल मीडिया पर किया था। पुलिस का कहना है कि 37 वर्षीय जगजीत सिंह, जो मूल रूप से तरनतारन जिले के मियांपुर गांव का निवासी है, 2010 में छात्र वीजा पर ब्रिटेन गया था, जहां उसने पढ़ाई पूरी की और 2013 में ब्रिटिश सेना में शामिल हो गया। बाद में उसने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क किया और अकालजोत खालिस्तान फोर्स (एकेएफ) नामक एक कट्टरपंथी समूह की स्थापना की।

पंजाब पुलिस ने एक अन्य तस्वीर जारी कर इसे जगजीत सिंह की ताजा तस्वीर बताया है। पुलिस को संदेह है कि राज्य में हुए हालिया ग्रेनेड हमलों के पीछे यही ब्रिटिश सिख सैनिक हो सकता है। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि अक्टूबर और नवंबर में पंजाब में कई आतंकी हमले हुए थे, जिनमें हथगोले और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के इस्तेमाल से हमले किए गए थे, जिसमें लुधियाना में हिंदू समूहों के नेताओं के घरों पर पेट्रोल बम का इस्तेमाल भी किया गया था। इसके बाद दिसंबर में शहीद भगत सिंह नगर जिले के काठगढ़ पुलिस थाने के तहत आने वाली असरों पुलिस चौकी पर एक हथगोला फेंका गया था।

इन हमलों की जिम्मेदारी नीता और फतेह सिंह बागी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ली थी, जिसमें उन्होंने खुद को "सर्विलांस और रिकॉन्सेंस यूनिट" का हिस्सा बताया, जो कि केजेडएफ के तहत काम करती है। इन केजेडएफ मॉड्यूल्स की जांच के दौरान पंजाब पुलिस को ब्रिटिश सेना के एक सिख सैनिक जगजीत सिंह (37) का नाम मिला है, और पुलिस को संदेह है कि वह अपनी असली पहचान छिपाने के लिए फतेह सिंह बागी नाम का इस्तेमाल कर रहा है। पुलिस ने कहा कि जगजीत सिंह की वर्तमान स्थिति और उनकी सेवा में होने की पुष्टि के लिए ब्रिटिश अधिकारियों से जानकारी मांगी जाएगी, और यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विवाद बन चुका है।