Article

जगदगुरु रामभद्राचार्य का बयान: RSS प्रमुख मोहन भागवत हिंदू धर्म के नेता नहीं हैं

 26 Jun 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि यह केवल भागवत का व्यक्तिगत बयान हो सकता है और यह समग्र संत समुदाय का विचार नहीं है। रामभद्राचार्य ने स्पष्ट किया कि मोहन भागवत एक संगठन के प्रमुख हो सकते हैं, लेकिन वह हिंदू धर्म के सर्वोच्च नेता नहीं हैं, जिनकी बात को सभी को मानना चाहिए। इससे पहले, अखिल भारतीय संत समिति (एकेएसएस) ने भी भागवत के बयान की आलोचना की थी।


समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा था कि जब धर्म का सवाल उठे, तो उसका निर्णय धार्मिक गुरुओं को ही करना चाहिए, और संघ और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को भी वही निर्णय मानना चाहिए। भागवत के बयान में क्या था? संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 21 दिसंबर को पुणे में हिंदू सेवा महोत्सव में यह बयान दिया था कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए, और यह बनकर भी हो गया है। उन्होंने कहा कि देश में नए मुद्दे उठाकर समाज में विभाजन पैदा करने से बचना चाहिए और हमें सद्भावना के साथ रहना चाहिए।

धार्मिक मामलों का निर्णय RSS नहीं, बल्कि धार्मिक गुरुओं को करना चाहिए


भागवत ने यह भी कहा था कि धार्मिक मामलों का निर्णय RSS नहीं, बल्कि धार्मिक गुरुओं को करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी थी कि कुछ लोग अयोध्या मुद्दे के बाद हिंदू समुदाय के नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही, भागवत ने समावेशी समाज की बात की और कहा कि देश संविधान के अनुसार चलता है, और लोग अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, जो सरकार चलाते हैं। 

उनके बयान के बाद, कुछ मस्जिदों के नीचे मंदिर होने के दावों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, और यूपी के संभल में हाल ही में इस मुद्दे पर हिंसा भी हुई थी। रामभद्राचार्य ने इस पर भी टिप्पणी की, कहा कि हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को वापस पाना चाहिए और इसके लिए सभी तरह के उपायों का उपयोग करना चाहिए, चाहे वह साम, दाम, दंड या भेद हो।

Read This Also:- संभल की शाही जामा मस्जिद की सर्वेक्षण रिपोर्ट लगभग तैयार, जनवरी में होगी अदालत में पेश