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चुनाव प्रक्रिया में बदलाव पर कांग्रेस का एतराज, नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

 01 Jul 2026

कांग्रेस ने मंगलवार को चुनाव से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने पर रोक लगाने वाले नए नियम को सुप्रीम कोर्ट(SC) में चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने 20 दिसंबर को चुनाव संचालन नियमों में बदलाव करते हुए पोलिंग स्टेशन के CCTV फुटेज, वेबकास्टिंग रिकॉर्डिंग और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने पर रोक लगाई थी।  


कांग्रेस का आरोप: पारदर्शिता पर हमला

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा, "चुनाव आयोग को चुनाव संचालन नियम, 1961 में एकतरफा संशोधन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता से क्यों डरता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे "मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर हमला" करार दिया। खड़गे ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "पहले मोदी सरकार ने CJI को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया और अब चुनावी जानकारी जनता से छिपाई जा रही है। यह सरकार की सोची-समझी साजिश है।"

क्यों किया गया नियम में बदलाव? 

कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग की सिफारिश पर 20 दिसंबर को चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93(2)(A) में संशोधन किया। पहले यह नियम चुनाव से संबंधित सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की अनुमति देता था। अब इसे संशोधित कर "नियमानुसार" सार्वजनिक करने का प्रावधान जोड़ा गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद यह बदलाव किया गया। अदालत ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से जुड़े दस्तावेज, जिनमें CCTV फुटेज भी शामिल थे, साझा करने का आदेश दिया था। चुनाव आयोग ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि नियम 93 में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल नहीं है।

चुनाव आयोग की सफाई 

चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्ट किया कि नामांकन पत्र, चुनाव एजेंट की नियुक्ति, चुनाव परिणाम और उम्मीदवारों का चुनावी खर्च जैसे दस्तावेज सार्वजनिक किए जा सकते हैं। लेकिन CCTV फुटेज, वेबकास्टिंग रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज इस दायरे में नहीं आते। एक आयोग अधिकारी ने कहा, "पोलिंग स्टेशन की CCTV कवरेज और वेबकास्टिंग पारदर्शिता के लिए की जाती है, लेकिन यह चुनाव संचालन नियम के तहत नहीं आती। संशोधन से यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल नियमों में वर्णित दस्तावेज ही सार्वजनिक किए जाएं। अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज को साझा करने की अनुमति नहीं होगी।"

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