Article

बांग्लादेश के लोग कैसे बन रहे भारत के नागरिक, बड़ा खुलासा, अब तक 11 गिरफ़्तार

 01 Jul 2026

दिल्ली पुलिस ने एक मर्डर केस की जांच के दौरान बांग्लादेशियों को अवैध रूप से भारत में बसाने से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से पांच बांग्लादेशी नागरिक हैं और छह लोग फर्जी दस्तावेज बनाने वाले रैकेट से जुड़े हुए हैं। डीसीपी साउथ, अंकित चौहान के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान करने के लिए एक विशेष ऑपरेशन शुरू किया है।


गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिक संगम विहार और रोहिणी इलाके से पकड़े गए, जबकि फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के सदस्य भी गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से 6 लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन, आधार कार्ड बनाने की मशीन, रिकॉर्ड रजिस्टर और विभिन्न दस्तावेज़, 25 आधार कार्ड, 4 मतदाता पहचान पत्र, और 8 पैन कार्ड बरामद किए हैं, जिनका संबंध बांग्लादेशी नागरिकों से हो सकता है।

पुलिस ने बताया कि इस रैकेट का खुलासा अक्टूबर में हुई एक हत्या की जांच के दौरान हुआ। शिंटू शेख नामक व्यक्ति की हत्या के मामले में पता चला कि शिंटू ने इन आरोपियों को अवैध रूप से भारत लाया था, और बाद में पैसों के विवाद में उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि यह रैकेट बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध तरीके से भारत में लाने के लिए जंगल के रास्ते का इस्तेमाल करता था। उन्हें बाइक और अन्य स्थानीय परिवहन के माध्यम से दिल्ली लाया जाता था, और फिर उन्हें उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी भेज दिया जाता था। दिल्ली में, रजत मिश्रा नामक व्यक्ति उनका फर्जी दस्तावेज़ तैयार करता था। अब तक, पुलिस ने 21 आधार कार्ड, 6 पैन कार्ड और वोटर कार्ड बरामद किए हैं।

इस मामले में पुलिस ने यह भी बताया कि शिंटू शेख की हत्या के मामले में चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। इन आरोपियों ने बताया कि शिंटू उन्हें धमकाता था, और इस कारण उन्होंने उसकी हत्या की योजना बनाई थी। हत्या के बाद, आरोपियों ने शिंटू की नकदी और सामान लूट लिया था, जो बाद में पुलिस ने बरामद किया।

पुलिस ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच की है: फर्जी भारतीय दस्तावेज़ बनाने के तरीके। अवैध घुसपैठ को सुविधाजनक बनाने वाले रूट और तंत्र। बरामद वोटर आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों की जांच।

फर्जी दस्तावेज़ों की जांच में यह सामने आया कि आरोपियों ने अपने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ तैयार करने के लिए एक फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल किया था। 'पूनम ऑनलाइन कंप्यूटर सेंटर' के मालिक साहिल सहगल ने इन दस्तावेज़ों को बनाने में मदद की। साथ ही, रंजीत और अफरोज नामक दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज़ बनाने में सहयोग किया था। इस गिरोह के माध्यम से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, और कोविड प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे थे, जो मामूली कीमतों पर उपलब्ध थे।