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बांग्लादेश मक्का समझौते में शामिल होने के संकेत, भारत चिंतित

 31 Aug 2026

बांग्लादेश का मक्का समझौते पर रुख

बांग्लादेश की स्थिति में हाल के दिनों में बदलाव देखने को मिल रहा है। देश ने बार-बार उकसाने वाले बयान दिए हैं और चालाकी से मक्का समझौते में शामिल होने के संकेत दिए हैं, जिसे 'इस्लामिक नाटो' के रूप में देखा जा रहा है। रविवार को ढाका ने कहा कि उसे इस सैन्य समझौते में शामिल होने में 'कोई जोखिम नहीं' दिखाई देता है और यह उसके अन्य देशों के साथ रिश्तों को प्रभावित नहीं करेगा।


विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने एक बयान में कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट एक 'अनूठा समझौता' है, जो बांग्लादेश के लिए नए रणनीतिक अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने बताया कि ढाका इस मामले पर अपने द्विपक्षीय साझेदार देशों से बातचीत कर रहा है और यह चर्चा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। कबीर का कहना था, "बांग्लादेश को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा।"


बांग्लादेश की नीतिगत स्थिति

हालांकि, बांग्लादेश को अभी तक इस समझौते में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन उसने बयान देकर भारत को चुनौती देने का प्रयास किया है। विदेश मंत्री खालिलुर रहमान ने कहा था कि यदि बांग्लादेश को मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिलता है, तो सरकार इस पर सकारात्मक विचार करेगी। उन्होंने इसे 'मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला' भी करार दिया था।


विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह कदम उसकी गुटनिरपेक्ष नीति से भटकने का संकेत दे सकता है। पूर्व राजदूत महफुजुर रहमान ने कहा कि बांग्लादेश को सैन्य गठबंधन में शामिल होने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उसके लिए लंबे समय तक समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है।


भारत की सुरक्षा चिंताएं

बांग्लादेश के मक्का समझौते में शामिल होने के विचार से भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तान पहले से ही इस समझौते का हिस्सा है, और यदि बांग्लादेश भी इसमें शामिल होता है, तो भारत के लिए यह एक नई चुनौती बन सकता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर सतर्क रुख अपनाया है, और प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए है।


विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की खाड़ी देशों के साथ विश्वसनीय साझेदारियां इस स्थिति में काम आ सकती हैं। बावजूद इसके, बांग्लादेश का यह रुख उसके पारंपरिक नीतिगत दृष्टिकोण से भिन्न है और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो सकता है।


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