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लोकसभा स्पीकर ने 20 TMC बागी सांसदों को नोटिस भेजा, जवाब दें
26 Aug 2026
TMC बागी सांसदों को नोटिस जारी
TMC बागी सांसद: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं से संबंधित है। स्पीकर के कार्यालय ने सभी बागी सांसदों को नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
उल्लेखनीय है कि अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई को लेकर भी याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा अयोग्यता याचिकाओं पर समयमबद्ध निर्णय न लेने का आरोप लगाया था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर बागी सांसदों को नोटिस जारी किया, जिसके बाद स्पीकर के कार्यालय द्वारा भी नोटिस जारी किया गया।
बागी सांसदों की पहचान
TMC बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय कर रहे हैं। इस समूह में कई प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनमें पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, जून मालिया और प्रसून बनर्जी शामिल हैं।
अभिषेक बनर्जी ने 18 जून को इन 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें उनकी लोकसभा सदस्यता से अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। TMC का तर्क है कि इन सांसदों ने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन अब वे NCPI के साथ जाने का निर्णय ले चुके हैं।
विवाद का कारण और बागियों का दावा
यह विवाद तब शुरू हुआ जब TMC के 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर खुद को एक अलग समूह के रूप में प्रस्तुत किया और NCPI में विलय की घोषणा की। बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की भी मांग की थी, यह दावा करते हुए कि उनके पास TMC के सांसदों का दो-तिहाई समर्थन है।
बागी सांसदों का कहना है कि उनके द्वारा किया गया विलय दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आता, जबकि अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला TMC धड़ा इस दावे का विरोध करता है। उनका कहना है कि केवल किसी दूसरी पार्टी में जाना अपने आप में वैध विलय नहीं होता।
स्पीकर का निर्णय और सुप्रीम कोर्ट में मामला
TMC बागी सांसद: लोकसभा स्पीकर ने बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की व्यवस्था तो दी है, लेकिन उन्हें अब तक अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता नहीं दी गई। इसके साथ ही, बागी सांसदों को नोटिस जारी कर उनकी ओर से अयोग्यता याचिकाओं पर जवाब मांगा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला अब औपचारिक सुनवाई के अगले चरण में पहुंच चुका है।
अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के फैसले में कथित देरी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 25 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की और बागी सांसदों को नोटिस जारी किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि स्पीकर का कार्यालय पहले ही सांसदों को नोटिस जारी कर चुका है।
भविष्य की संभावनाएँ
अब बागी सांसदों को स्पीकर के नोटिस का जवाब सात दिनों के भीतर देना होगा, जिसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि उनका NCPI में विलय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल माना जाएगा या नहीं। साथ ही, उन्हें यह भी बताना होगा कि अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं को क्यों खारिज किया जाना चाहिए।
इस मामले का फैसला 20 सांसदों की लोकसभा सदस्यता का भविष्य तय करने के साथ-साथ संसद में TMC की संख्या, बागी धड़े की राजनीतिक स्थिति और NDA के मौजूदा संख्या समीकरण पर भी प्रभाव डाल सकता है। जून में बागी सांसदों के NCPI में विलय के दावे के बाद NDA की लोकसभा संख्या में संभावित बदलाव पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
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