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दिल्ली में सवर्णों का आंदोलन, भाजपा के लिए चुनौती।
24 Aug 2026
सवर्णों का आंदोलन विरोध प्रदर्शन
सवर्णों का आंदोलन: दिल्ली में रविवार को जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ सवर्ण समुदाय के लोगों का प्रदर्शन तेज हो गया। इस दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। यह आंदोलन उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के करीब होने के कारण भारतीय जनता पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन जारी रहता है, तो भाजपा के सवर्ण वोटबैंक पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट मोड में रहने का निर्णय लिया है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार करने की बात कही है।
सरकार का सक्रियता
सवर्णों का आंदोलन: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण सुधार आंदोलन के मुद्दों पर केंद्रीय नेतृत्व गहन विचार करेगा। उपमुख्यमंत्री ने हर्ष दुबे के साथ संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
पाठक ने कहा, 'हमने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से संबंधित पत्र को केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। उन्होंने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।'
राजनीतिक हलचल और प्रतिक्रियाएँ
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के कुछ नेता मानते हैं कि जाति जनगणना के निर्णय ने सवर्ण समुदाय को नाराज कर दिया है। एक भाजपा सांसद ने बताया कि सवर्णों को यह चिंता है कि जाति के आंकड़े जारी होने के बाद ओबीसी में आरक्षण बढ़ाने की मांग में तेजी आएगी।
इस बीच, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाह ने ओबीसी कोटा बढ़ाने की मांग उठाई है। उन्होंने बिहार में इसे 65 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही है, जो उनके पार्टी सम्मेलन में पारित प्रस्ताव का हिस्सा है।
विपक्ष की स्थिति
सवर्णों का आंदोलन: बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने जाति-आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम संविधान के उद्देश्यों के खिलाफ होगा और अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान भेदभाव को समाप्त करने के लिए आवश्यक है।
प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस में तख्तियाँ उठाकर अपनी मांगों को रखा। उन्होंने आरक्षण और सरकारी सहायता के लिए आर्थिक मानदंडों पर जोर देने की मांग की, साथ ही मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने की बात की।
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