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नागपुर नगर निगम वंदे मातरम्: सिर्फ दो अंतरे, BJP पर सवाल उठे
21 Aug 2026
नागपुर नगर निगम वंदे मातरम्: आमसभा में 'वंदे मातरम्' का सीमित गायन
नागपुर नगर निगम वंदे मातरम्: गुरुवार को नागपुर नगर निगम (NMC) की आमसभा में 'वंदे मातरम्' के केवल दो अंतरे गाए गए। यह ध्यान देने योग्य है कि नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार है, और हाल के दिनों में बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरे गाने का आरोप लगाया है। ऐसे में, NMC में भी यही स्थिति उत्पन्न होने से प्रशासनिक स्तर पर प्रश्न उठने लगे हैं।
यह बैठक सादर के नियोजन भवन में आयोजित की गई, जहां परंपरा के अनुसार सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले 'वंदे मातरम्' गाया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, नगर निकाय में अब तक केवल दो अंतरे ही गाए जाते रहे हैं।
केंद्र के निर्देशों की अवहेलना?
नागपुर नगर निगम वंदे मातरम्: इस मामले की अहमियत इस कारण भी बढ़ गई है क्योंकि केंद्र ने सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' का पूरा गायन किए जाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
हालांकि, इस बैठक में बीजेपी के किसी सदस्य ने दो अंतरे गाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इससे यह सवाल उठता है कि केंद्र के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया और 'वंदे मातरम्' का पूरा गायन क्यों नहीं हुआ।
गृह मंत्रालय के निर्देश और नगर निगम सचिव का बयान
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी छह अंतरे गाने का निर्देश दिया है, और पूरा राष्ट्रगीत गाने में लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है।
एक समाचार पत्र 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से बातचीत में NMC की सचिव रंजना लाडे ने कहा था कि बैठक में पूरा गीत गाया गया था। लेकिन जब उन्हें बताया गया कि केवल दो अंतरे गाए गए थे, तो उन्होंने इस पर अनभिज्ञता व्यक्त की और जांच करने का आश्वासन दिया।
राजनीतिक रुख और कानूनी संरक्षण
नागपुर नगर निगम वंदे मातरम्: इस घटना ने नगर निगम में बीजेपी के राजनीतिक रुख और उसके नियंत्रण में चलने वाले निकाय के कार्यों में अंतर को उजागर किया है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि केंद्र के निर्देशों के बावजूद 'वंदे मातरम्' का पूरा गायन क्यों नहीं कराया गया।
नागपुर प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त 2026 को National Honour Insult Prevention Act, 2026 को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 'वंदे मातरम्' को कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। इस कानून के अनुसार, राष्ट्रगीत का अपमान करना या इसे गाने में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना गया है।
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