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सीजेआई सूर्यकांत के सामने वकील का रोष, गरीबों पर उठे सवाल।
21 Aug 2026
सीजेआई सूर्यकांत: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील की शिकायत
सीजेआई सूर्यकांत: सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान एक वकील ने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि उन्हें महसूस हो रहा है कि गरीब वकीलों के लिए इस अदालत में कोई स्थान नहीं है। वकील ने बताया कि वे बार-बार शिकायत करने के बावजूद रजिस्ट्री में हो रही देरी का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि रजिस्ट्री में केवल फाइलों का खेल चल रहा है, जिससे उन्हें एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक दौड़ाया जा रहा है।
अपने अनुभव साझा करते हुए वकील ने कहा, "मैंने 25 मई को इस मामले को आपके सामने उठाया था। आपने आश्वासन दिया था कि आप व्यक्तिगत रूप से इसे देखेंगे, लेकिन आज भी मुझे परेशान किया जा रहा है।" उन्होंने उदाहरण दिया कि एक मामले में रजिस्ट्री ने कहा था कि 18 जून को सभी समस्याएं हल कर दी गई थीं, फिर भी इसे 14 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया गया।
सीजेआई का वकील को आश्वासन
वकील ने आगे कहा कि रजिस्ट्रार से मिलने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब वह सेक्रेटरी जनरल के पास जाते हैं, तो वह रजिस्ट्रार को फोन कर देते हैं, और जब वह रजिस्टार के पास जाते हैं, तो वह किसी और को फोन करते हैं।
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा, "आपने शिकायत क्यों नहीं भेजी?" वकील ने उत्तर दिया कि वह पिछले छह महीनों से लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है। सीजेआई ने कहा, "यहां कोई रजिस्ट्रार नहीं बैठा है।" वकील ने अनुरोध किया कि वह आज ही रजिस्ट्रार से मिलना चाहते हैं। सीजेआई ने उन्हें लिखित में शिकायत देने का सुझाव दिया और भरोसा दिलाया कि वे मदद करेंगे।
वकील की पीड़ा और संसाधनों की कमी
सीजेआई के आश्वासन के बाद वकील ने कहा, "मेरे पास सारे पत्र हैं। मैंने सभी पत्र सेक्रेटरी जनरल को भेजे हैं।" उन्होंने अपनी स्थिति को व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे बहुत बुरा लग रहा है। मुझे अत्यधिक प्रताड़ित किया गया है। मुझे ऐसा लगता है कि मेरे जैसे गरीब वकील के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई स्थान नहीं है।"
सीजेआई सूर्यकांत: उन्होंने अपनी संसाधनों की कमी का भी जिक्र किया, जिसके कारण वे अपने अधिकारों की मांग करने में असमर्थ हैं। इस प्रकार, वकील ने सुप्रीम कोर्ट में गरीब वकीलों के प्रति हो रहे भेदभाव का मुद्दा उठाया, जो न्यायिक प्रणाली की संवेदनशीलता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।
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