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सोशल मीडिया पर निगरानी का निर्देश, राहुल गांधी का नया कदम

 21 Aug 2026

सोशल मीडिया गतिविधियों पर निगरानी का निर्देश

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने निर्देश दिया है कि पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर ध्यान दिया जाए। उनका यह कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नेता सामाजिक न्याय से संबंधित मुद्दों पर पार्टी के दृष्टिकोण को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।


यह निर्देश कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में कहा था कि कई नेता सार्वजनिक मंचों पर पार्टी के विचारों को सही तरीके से आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।


खरगे की चिंता और जातिगत भेदभाव का मुद्दा

CWC की बैठक में, खरगे ने हल्द्वानी में हुई एक घटना का जिक्र किया, जहां कथित तौर पर आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं ने 'शुद्धिकरण' किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में पार्टी को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, और इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की।


समाचार पत्र 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के अनुसार, कुछ नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन करने का दावा किया था, जिस पर खरगे ने तंज करते हुए कहा कि जो लोग 'अच्छा लिखते हैं और अच्छे दिखते हैं', उन्होंने इस मुद्दे को मजबूती से नहीं उठाया। उन्होंने नेताओं से भविष्य में ऐसे मामलों में सक्रियता से आगे आने का आह्वान किया।


राहुल गांधी और मनीष तिवारी के बीच मतभेद

बैठक के दौरान, राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के बीच देश में छात्र आंदोलनों के इतिहास और उनके स्वरूप के संबंध में मतभेद भी सामने आए। तिवारी ने कहा कि अतीत में चार प्रमुख छात्र आंदोलन, जिनमें मंडल आयोग के विरोध का आंदोलन भी शामिल है, स्वाभाविक रूप से उभरे थे और राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों ने उनका नेतृत्व नहीं किया।


इसके विपरीत, राहुल गांधी ने यह कहा कि छात्र लंबे समय तक कांग्रेस के साथ थे। इस मतभेद के एक दिन बाद, मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विंस्टन चर्चिल का एक कथन साझा किया, जिसे बैठक में हुई बहस और नेतृत्व को एक अप्रत्यक्ष चेतावनी के रूप में देखा गया। चर्चिल के अनुसार, आलोचना को आवश्यक बताया गया है और इसका समय पर ध्यान दिया जाए तो खतरे से बचा जा सकता है।


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