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भाजपा ने विनोद तावड़े को यूपी की कमान दी, बिहार में असर दिखा
19 Aug 2026
विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया
भारतीय जनता पार्टी ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है, जो पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक माने जाते हैं। पिछले दो वर्षों से तावड़े अनौपचारिक रूप से यूपी में पार्टी संगठन का प्रभार संभाल रहे थे। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को उन्हें औपचारिक रूप से इस जिम्मेदारी सौंप दी। तावड़े को बिहार में अपने संगठनात्मक कौशल का प्रदर्शन करने के बाद अब उत्तर प्रदेश में पार्टी की हैट्रिक के लिए जिम्मेदारी दी गई है।
उन्हें राष्ट्रीय मंत्री जगदीश ईश्वरभाई पटेल के साथ सह प्रभारी के रूप में भी नियुक्त किया गया है। एक दिन पहले ही तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर पुनः नियुक्त किया गया था, और फिर तुरंत यूपी के प्रभारी का कार्यभार सौंपा गया। तावड़े को 2022 में बिहार का प्रभारी बनाया गया था, जब वहां नीतीश कुमार एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री थे, और तब उन्होंने लक्ष्य निर्धारित किया था कि भाजपा की सरकार बनानी है।
तावड़े का यूपी में अनुभव
विनोद तावड़े की भूमिका यूपी में संगठनों से लेकर सरकार तक में महत्वपूर्ण रही है। वे यूपी भाजपा के संगठन चुनाव के केंद्रीय पर्यवेक्षक रहे हैं और योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। तावड़े ने कई बार उत्तर प्रदेश का दौरा किया है और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्रियों से मुलाकात की है।
पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत कर उन्होंने नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अब प्रदेश में क्षेत्रीय टीमों का गठन होना है, जिसमें उन्होंने हाल ही में दिल्ली में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ बैठक की थी।
सामाजिक समीकरणों का ध्यान
भाजपा ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी को प्राथमिकता दी है। विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखते हुए तावड़े और पटेल को प्रभारी नियुक्त किया गया है। विनोद तावड़े महाराष्ट्र के मराठा क्षत्रिय बिरादरी से हैं, जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
इस प्रकार, पार्टी ने अपने नेतृत्व में सामाजिक विविधता को ध्यान में रखा है, जिससे चुनावी आधार को मजबूत किया जा सके।
केंद्रीय संसदीय बोर्ड में बदलाव की तैयारी
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में बदलाव के बाद अब केंद्रीय संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति के गठन पर सभी की निगाहें हैं। पार्टी अध्यक्ष को विभिन्न राज्यों के लिए संगठन प्रभारियों की नियुक्ति करनी है, जिसमें पुराने पदाधिकारियों के स्थान पर नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
केंद्रीय संसदीय बोर्ड, जो पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णयों की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाता है, में छह बदलाव होने की संभावना है। इससे पार्टी के अंदर नई सोच और दृष्टिकोण को शामिल करने का अवसर मिलेगा।
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