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दिमागी नक्सल पार्टी का नया मंच, लाखों लोग तेजी से जुड़े।
17 Aug 2026
दिमागी नक्सल पार्टी: नए दल का उदय
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद अब एक नई राजनीतिक पहल 'दिमागी नक्सल पार्टी' (Dimagi Naxal Party) सामने आई है। इस दल से अब तक लाखों लोग जुड़ चुके हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद से यह नया नाम राजनीतिक और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया। इस भाषण के तुरंत बाद इंस्टाग्राम पर 'Dimagi Naxal Party' (@dimaginaxalparty) नाम से एक पेज शुरू हुआ, जिसने 24 घंटे के भीतर 1 लाख से अधिक और 48 घंटों में 1.8 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हासिल किए।
पार्टी की पहचान और विचारधारा
दिमागी नक्सल पार्टी: यह नई पार्टी न तो आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है और न ही इसे राजनीतिक दल के रूप में मान्यता मिली है। इसके बावजूद, प्रधानमंत्री के बयान से प्रेरित होकर यह एक सोशल मीडिया पहल के रूप में उभरी है। इस पार्टी का X (ट्विटर) पर 'दिमागी नक्सल जनता पार्टी' नाम से भी एक अकाउंट है, जिसके फॉलोअर्स की संख्या 7,000 से अधिक है। पार्टी का मोटो है 'सोचो। रिसर्च करो। विरोध करो।' इसके संस्थापक को 'एक दिमागी भारतीय' बताया गया है, जबकि सह-संस्थापक का संदर्भ एक '56 इंच वाले' व्यक्ति से जोड़ा गया है।
समर्थन और तुलना
पार्टी के इंस्टाग्राम पेज पर कई प्रमुख हस्तियों का समर्थन देखा जा रहा है, जिनमें हास्य कलाकार कुणाल कामरा, यूट्यूबर ध्रुव राठी, अभिनेता प्रकाश राज और फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप शामिल हैं। सोशल मीडिया पर इसकी तुलना हाल ही में बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) से की जा रही है, जिसने भी एक न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद तेजी से लोकप्रियता हासिल की थी। CJP ने भी महज 10 दिनों में 2 करोड़ फॉलोअर्स प्राप्त किए थे।
साइबर हमलों का सामना
पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच, सोमवार को उसके आधिकारिक X हैंडल (@DNJP_India) पर यह दावा किया गया कि उनके इंस्टाग्राम पेज पर साइबर हमले हो रहे हैं। पोस्ट में लिखा गया, 'इंस्टाग्राम पर हमारे खिलाफ साइबर अटैक शुरू हो चुका है। देखते हैं कि क्या वे हमारी आवाज दबाने में सफल होते हैं!' इसके बाद, 'Dimagi Naxal Party' का इंस्टाग्राम पेज अचानक ऑफलाइन हो गया, और यह अब अनुपलब्ध है।
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया
दिमागी नक्सल पार्टी: प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कहा था कि देश ने सशस्त्र नक्सलवाद को पीछे धकेल दिया है, लेकिन कुछ 'दिमागी नक्सल' अभी भी युवाओं को गुमराह करने के प्रयास में हैं। उन्होंने देशवासियों से इन विचारधाराओं को पहचानने और अलग-थलग करने की अपील की थी। इसके बाद, विपक्ष ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के नेता पी. चिदंबरम ने कहा, 'मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।' वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे प्रधानमंत्री की 'हताशा का संकेत' करार दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण दिया कि यह शब्द केवल उन लोगों के लिए है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं।
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