Article

उमर अब्दुल्ला ने PoJK पर चिंता जताई, 80 साल पुराना फैसला सही

 15 Aug 2026

उमर अब्दुल्ला PoJK पर क्या बोले?

उमर अब्दुल्ला PoJK: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) पर बड़ा बयान दिया। श्रीनगर में तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार की स्थिति देखकर उन्हें यह समझ में आता है कि लगभग 80 साल पहले देश के नेताओं द्वारा लिया गया निर्णय सही था। उन्होंने यह भी कहा कि 'हमलावर खबरदार' का नारा लगाने वाले लोग सही थे और उनके बलिदान पूरी तरह से उचित थे।


उमर अब्दुल्ला PoJK: उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि LoC के दूसरी ओर जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर उन्हें गहरी पीड़ा और अफसोस होता है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब वहां पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ हाल में विरोध-प्रदर्शनों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें लोगों के मारे जाने और घायल होने की रिपोर्ट भी आई हैं।


80 साल पहले के निर्णय पर पुनर्विचार

चर्चा करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब वह LoC के दूसरी ओर की स्थिति पर नजर डालते हैं, तो उन्हें लगता है कि 80 साल पहले भारतीय नेताओं का निर्णय सही था। उन्होंने कहा कि उस समय जिन लोगों ने 'हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार' का नारा लगाया था, वे सही थे। उमर ने यह भी कहा कि उस समय के लोगों का बलिदान पूरी तरह से उचित था।


उमर अब्दुल्ला PoJK: उनका यह बयान 1947 के उस दौर से संबंधित है, जब जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद संघर्ष की शुरुआत हुई थी। इस दौरान कश्मीर में हमलावरों के खिलाफ लोगों की लामबंदी और प्रतिरोध की आवाजें उठी थीं।


PoJK के लोगों को भारतीय मानते हैं

उमर अब्दुल्ला ने PoJK में निवास कर रहे लोगों के प्रति अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत के लिए LoC के दूसरी ओर रहने वाले लोग अपने ही हैं और उन्हें बाहरी व्यक्ति के तौर पर नहीं देखा जाता। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह महसूस होता है कि यदि 2019 में परिस्थितियां नहीं बदली होतीं, तो संभवतः उस क्षेत्र के जम्मू-कश्मीर के लोग आज भारत के साथ फिर से जुड़ने की मांग कर रहे होते।


उमर ने कहा कि वह हिस्सा जम्मू-कश्मीर का है और वहां के लोग उनके अपने हैं। उनके अनुसार, 'कोई अजनबी नहीं है, कोई बाहरी नहीं है।'


जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoJK के लिए सीटें

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoJK के लिए सुरक्षित सीटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भी इन लोगों के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित हैं और उम्मीद है कि भविष्य में वे लोग इन खाली सीटों का उपयोग कर सकेंगे।


जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 24 सीटें अलग रखी गई हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इन सीटों पर चुनाव नहीं होते और ये सीटें खाली रहती हैं। 2022 के परिसीमन के बाद भी PoJK के लिए रखी गई इन 24 सीटों को अलग रखा गया है।


2019 के बदलावों का जिक्र

उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान में 2019 के बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय हालात नहीं बदले होते, तो PoJK के लोग शायद आज भारत के साथ जुड़ने की आवाज उठाने वाले होते। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे से जुड़े प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव किया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन हुआ और 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आए।


उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में न केवल PoJK का मुद्दा उठाया, बल्कि लोकतंत्र और संघवाद को भी देश की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना और उसे मजबूती प्रदान करना देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, उन्होंने संघवाद को भी एक ऐसी जिम्मेदारी बताया, जिसे नकारा नहीं जा सकता।


Read This Also:- वंदे मातरम विवाद: सोनिया-खरगे पर आरोप, कांग्रेस की सफाई अब।