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सुप्रीम कोर्ट का FSSAI को अल्टीमेटम, नहीं किया तो हम करेंगे!
13 Aug 2026
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी और FSSAI की हिचकिचाहट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 13 अगस्त को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से पैकेज्ड फूड उत्पादों पर वॉर्निंग लेबल लगाने में दिख रही हिचकिचाहट पर गंभीर चिंता जताई। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की बेंच ने स्पष्ट किया कि यह मामला नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों की सेहत से जुड़ा है।
कोर्ट ने कहा, 'अगर आप ऐसा नहीं कर सकते, तो हम करेंगे', यह दर्शाते हुए कि अधिकारी कॉर्पोरेट दबाव में काम कर रहे हैं। FSSAI को पहले भी निर्देश दिए गए थे कि वह जन स्वास्थ्य के हित में वॉर्निंग लेबल लगाने पर विचार करे।
FSSAI की कार्यप्रणाली पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि FSSAI के मीटिंग मिनट्स के अनुसार, वह वॉर्निंग लेबल को लागू करने में अनिच्छुक है। याचिकाकर्ता के वकील ने मार्च में हुई एक मीटिंग का हवाला देते हुए कहा कि उसमें लिए गए निर्णय पहले के आदेशों के विपरीत हैं।
FSSAI ने उद्योग के विरोध का हवाला देते हुए वॉर्निंग लेबल के स्थान पर अतिरिक्त चीनी, सैचुरेटेड फैट और नमक की आवश्यकता की जानकारी देने का सुझाव दिया है।
कॉर्पोरेट दबाव का प्रभाव
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के एफिडेविट में केवल खाद्य उद्योग की आपत्तियों का उल्लेख करने पर भी सवाल उठाया। सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सबूतों को नजरअंदाज करने पर कोर्ट ने चिंता जताई कि क्या FSSAI कॉर्पोरेट हितों के आगे झुक रहा है।
बेंच ने कहा, 'क्या आप कोर्ट को बेवकूफ़ बना रहे हैं? इन सभी कॉर्पोरेट हाउसों का आप पर बहुत दबाव है।' कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह यह कार्रवाई जनहित में कर रहा है।
सरकार की कार्रवाई पर सवाल
बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) बृजेंद्र चाहर से सीधे सवाल किया कि क्या सरकार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का आदेश स्पष्ट है और सरकार को इसे मानना होगा।
गुस्से में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, 'क्या सरकार खुद ऐसा करेगी, या हमें ऑर्डर जारी करना होगा?' ASG ने कोर्ट से सरकार के एक्शन प्लान के बारे में बताने की अनुमति मांगी, लेकिन कोर्ट ने दोहराया कि सरकार को वही करना होगा जो कोर्ट ने कहा है।
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