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सुप्रीम कोर्ट ने बोस टिप्पणी पर स्वतः संज्ञान से इनकार किया।

 13 Aug 2026

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग को अस्वीकार कर दिया। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने की। इस दौरान वकील के प्रति CJI का गुस्सा सामने आया जब उन्होंने कहा कि हर मामले में स्वतः संज्ञान लेने की आवश्यकता नहीं होती।


CJI सूर्यकांत ने वकील से स्पष्ट कहा कि यदि उन्हें टिप्पणियों से इतनी आपत्ति है, तो उन्हें एक अलग याचिका दाखिल करनी चाहिए। यह कदम तब उठाया गया जब वकील ने कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की थी।


वकील का तर्क और CJI का स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट: वकील ने आरोप लगाया कि सांसद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने सवाल किया, "आप स्वतः संज्ञान क्यों चाहते हैं? औपचारिक याचिका क्यों नहीं दाखिल कर सकते?" वकील ने तर्क किया कि अदालत ने पहले भी ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लिया है, इसलिए यह मामला भी गंभीर है।


CJI ने स्पष्ट किया कि स्वतः संज्ञान की कार्रवाई केवल तब की जाती है जब कोई गंभीर सार्वजनिक मुद्दा हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "स्वतः संज्ञान तब लिया जाता है जब मामलों में वंचित और गरीब वर्ग की बात होती है, लेकिन यहां एक सक्षम वकील मौजूद हैं।"


जस्टिस बागची की सलाह

सुप्रीम कोर्ट: इस दौरान जस्टिस जोयमाल्या बागची ने भी वकील को याचिका दाखिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "चाहे स्वतः संज्ञान हो या याचिका, आपकी चिंता यह है कि कोई हेट स्पीच दे रहा है। आपको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उस पर लागू उचित प्रतिबंधों के सिद्धांतों के आधार पर इसकी जांच करनी होगी।"


उन्होंने आगे बताया कि वकील को अपनी चिंताओं के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और याचिका पेश करनी चाहिए।


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