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सीएम विजय ने विधानसभा में लोकसभा परिसीमन के खिलाफ आवाज उठाई!
12 Aug 2026
लोकसभा परिसीमन बिल के खिलाफ ठोस कदम
लोकसभा परिसीमन: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में परिसीमन बिल के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्र सरकार के इरादों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि वे दक्षिण भारत के अधिकारों की कीमत पर लोकसभा सीटों की संख्या नहीं बढ़ने देंगे। सीएम विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार 543 लोकसभा सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग करती है।
इस प्रस्ताव के माध्यम से विजय ने यह तर्क रखा कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों में वृद्धि से दक्षिण भारत का संसद में प्रतिनिधित्व कमजोर होगा।
850 सीटों का विरोध
लोकसभा परिसीमन: सीएम विजय ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या को 850 करने का निर्णय उन राज्यों के लिए हानिकारक होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू किया है। उन्होंने कहा, "यह केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि दक्षिणी राज्यों को परिसीमन से किसी भी प्रकार का नुकसान न होने दे।"
प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों की संख्या के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। विजय ने कहा, "महिलाओं को आरक्षण देना सामाजिक न्याय का मुद्दा है और इसमें कोई देरी नहीं होनी चाहिए।"
केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें
लोकसभा परिसीमन: सीएम विजय ने केंद्र सरकार के सामने चार महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। पहली, लोकसभा की सीटों की कुल संख्या को 543 पर स्थायी रूप से बनाए रखना है। दूसरी मांग यह है कि सीटों का बंटवारा मौजूदा प्रतिनिधित्व के अनुपात पर ही फ्रीज किया जाए। इसके अलावा, आबादी और राज्यों के बीच मौजूदा 2.2:1 अनुपात को बनाए रखने की मांग की गई है।
इसके साथ ही, 2029 के लोकसभा चुनाव में 543 सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की मांग भी की गई है।
परिसीमन बिल पर राजनीतिक विवाद
लोकसभा परिसीमन: गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया था, जिसमें लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। हालांकि, यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं कर सका और पारित नहीं हो पाया।
विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने इस बिल का विरोध किया है और महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर लागू करने की मांग की है।
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