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तमिल थाई वाल्तू हुआ अनिवार्य, तमिलनाडु में प्रस्ताव अब पारित

 10 Aug 2026

तमिल थाई वाल्तू: राज्य गीत को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में राज्य गीत 'तमिल थाई वाल्तू' का गायन अनिवार्य करने का प्रावधान है। विधानसभा में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार तमिलनाडु के भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।


अपने संबोधन में विजय ने स्पष्ट किया कि 'तमिल केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान और भावनाओं का प्रतीक है। मातृभाषा की पवित्रता अपनी मां के समान है।' इस प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए डीएमके और एआईएडीएमके ने भी सहमति जताई।


केंद्रीय सरकार का निर्देश और पूर्व आदेश

यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया सलाह के आधार पर लिया गया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 28 जनवरी के निर्देश का 'सख्ती से पालन' करने के लिए कहा गया था। इस निर्देश में आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को गाने का उल्लेख किया गया था।


तमिलनाडु सरकार ने पहले ही 23 नवंबर, 1970 को आदेश जारी कर दिया था कि 'तमिल थाई वाल्तू' का गायन सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में अनिवार्य होगा। इसके बाद 12 दिसंबर, 2021 को इस गीत को आधिकारिक रूप से राज्य गीत का दर्जा दिया गया और इसे कार्यक्रमों में पहले प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया।


राज्य गीत के संदर्भ में विवाद

हाल ही में 'तमिल थाई वाल्तू' को लेकर विवाद तब उत्पन्न हुआ, जब मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इसे 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रीय गान के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया। इस पर शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन और तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के स्थानीय विधायकों ने समारोह का बहिष्कार किया।


'तमिल थाई वाझ्थु' के रचनाकार प्रसिद्ध तमिल विद्वान सुंदरम पिल्लै हैं। यह पहली बार नहीं है जब राज्यपाल द्वारा 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रीय गान को 'तमिल थाई वाझ्थु' से पहले रखने पर विवाद उठाया गया। गत 10 मई को मुख्यमंत्री विजय और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी।


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