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FCRA बिल पर राजदूत ने अमेरिकी सांसद के आरोपों को नकारा!

 10 Aug 2026

FCRA बिल: राजदूत का स्पष्टीकरण

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, जिसे FCRA बिल के नाम से जाना जाता है, को लेकर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिका में चल रही सियासी बहस और कूटनीतिक चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने अमेरिकी सांसद राइली मूर द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने इस विधेयक के बारे में फैले पांच भ्रमों को दूर करने का प्रयास किया।


राइली मूर ने आरोप लगाया था कि यह कानून भारत सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों पर कब्जा करने की अनुमति देगा। इस संदर्भ में भारतीय राजदूत ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक से संबंधित भ्रांतियों का निवारण आवश्यक है।


भ्रमों का निवारण

FCRA बिल: पहला भ्रम यह है कि भारत नागरिक समाज की विदेशी मदद रोकने के लिए एक नया कानून लाने जा रहा है। इस पर क्वात्रा ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी फंडिंग को विनियमित करना भारत का संप्रभु अधिकार है, और FCRA कानून 1976 से लागू है। पिछले वर्षों में इसमें कई बार बदलाव किए गए हैं।


दूसरा भ्रम यह है कि नए कानून से NGO और चैरिटी संगठनों का काम ठप हो जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत में विदेशी फंडिंग वास्तव में बढ़ रही है। 2010-11 में लगभग 1.2 बिलियन डॉलर विदेशी फंड आया था, जो 2024-25 में बढ़कर 2.67 बिलियन डॉलर हो गया।


संपत्ति का अधिकार

तीसरा भ्रम यह था कि नए कानून के तहत चर्चों, अस्पतालों और स्कूलों की संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। राजदूत ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर संपत्तियां राज्य सरकार के पास ट्रांसफर होने का नियम 2010 से लागू है। 2026 के विधेयक में संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक डेजिग्नेटेड अथॉरिटी का निर्माण किया जाएगा।


चौथा भ्रम यह था कि यह कानून किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बना रहा है। क्वात्रा ने इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए कहा कि FCRA कानून सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होता है।


वैश्विक संदर्भ

FCRA बिल: पांचवें भ्रम के तहत कहा गया था कि भारत ऐसा कड़ा कानून बनाने वाला अकेला देश है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में 1938 से FARA और 2010 से FATCA लागू हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और ब्रिटेन में भी इसी तरह के कानून बनाए गए हैं।


विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और इसे संसद द्वारा निपटाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'दुनिया के कई देशों में विदेशी फंडिंग को विनियमित करने के कानून हैं, जिसमें अमेरिका भी शामिल है।'


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