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महिला आरक्षण विधेयक पर NCP सांसदों ने PM मोदी से की मुलाकात!
10 Aug 2026
महिला आरक्षण विधेयक की मांग
संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के बावजूद कई विधेयक बिना चर्चा के ही पारित हो गए हैं। सरकार की सूची में सोमवार को चार विधेयक शामिल हैं। इसी बीच, एनसीपी (एसपी) के आठ सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन विधेयक से अलग रखा जाए।
कांग्रेस ने भी इस मांग का समर्थन किया है। AICC सचिव सचिन सावंत ने कहा कि एनसीपी-एसपी के सांसदों को सरकार पर दबाव डालना चाहिए कि महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू किया जाए।
महाराष्ट्र के मुद्दों पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी-एसपी के विधायक प्रधानमंत्री के साथ महाराष्ट्र के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। सांसद सुप्रिया सुले ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा, "मेरे साथ कुछ सांसद प्रधानमंत्री से मिलेंगे और महाराष्ट्र की समस्याओं का जिक्र करेंगे, जिसमें पानी की समस्या, किसानों की खुदकुशी और शहरीकरण से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।"
उन्होंने कहा कि मुंबई पर तेजी से दबाव बढ़ रहा है, और इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
विलय के संकेत?
महिला आरक्षण विधेयक पर एकमत नहीं होते हुए एनसीपी-एसपी के नेता बीजेपी सांसद नवनीत राणा ने कहा कि यदि एनसीपी-एसपी के सांसद महाराष्ट्र की भलाई के लिए पीएम मोदी से मिल रहे हैं, तो यह एक स्वागत योग्य कदम है। एनसीपी-एसपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा कि अगर केंद्र आश्वासन देता है कि इसका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होगा, तो वह महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
वहीं, एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार ने कहा कि सभी सांसदों को इस विधेयक के खिलाफ संसद में आवाज उठानी चाहिए।
एफसीआरए विधेयक पर कड़ा विरोध
हालांकि, संसद के मौजूदा सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक पर उन्होंने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा, "एनसीपी इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप का स्पष्ट विरोध करती है। सरकार से हमारा विनम्र अनुरोध है कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित न किया जाए, बल्कि इसे वापस लिया जाए।"
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इसे वापस नहीं लेना चाहती, तो इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजना चाहिए ताकि सभी दलों के नेता मिलकर इस पर चर्चा कर सकें।
किसानों के मुद्दों पर नाराजगी
सुप्रिया सुले ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऋण माफी योजना से 12 लाख किसानों को बाहर किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "ऋण माफी को लेकर इस सरकार की संवेदनहीनता देखकर मैं स्तब्ध हूं। चुनाव के समय में सरकार ने निर्णय लिए, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सरकार के हाथ वापस कस गए हैं।"
उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों किसानों के लिए बनी ऋण माफी योजनाओं पर जटिल नियम लागू किए जा रहे हैं जबकि अन्य मामलों में सरकार को नियमों की याद नहीं रहती।
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