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सरकार ने FCRA बिल पर नरमी दिखाई, राहुल गांधी से की मुलाकात।

 06 Aug 2026

FCRA बिल: संसद में हंगामे का समाधान

संसद के मौनसून सत्र के दौरान बढ़ते हंगामे को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने विपक्ष से बातचीत का प्रयास किया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, जिसे FCRA बिल के नाम से जाना जाता है, के कुछ प्रावधानों में नरमी लाने को तैयार है। इसका मतलब है कि नए नियमों का पूर्व के मामलों या निवेशों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। मॉनसून सत्र 13 अगस्त तक जारी रहेगा, और इस दौरान FCRA बिल को पेश करना इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष चर्चा के लिए कितना तैयार है।


FCRA बिल पर विवाद और विपक्ष की स्थिति

FCRA बिल को लेकर कई धार्मिक समूहों, विशेष रूप से सिविल सोसायटी और ईसाई संगठनों ने 'संपत्ति-निहित' नियमों के संबंध में गंभीर चिंता व्यक्त की है। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) का एक प्रतिनिधिमंडल भी गृह मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मिला था।


इस बिल की धारा 14B में FCRA प्रमाणपत्र की 'समाप्ति' का नया प्रावधान शामिल किया गया है, जिससे यह आशंका जताई गई है कि जिन संस्थाओं ने विदेशी चंदा लेना बंद कर दिया है, उनके प्रमाणपत्र समाप्त माने जा सकते हैं। इस स्थिति में उनके द्वारा संचालित स्कूल, अस्पताल या चर्च जैसी संपत्तियां सरकारी प्राधिकरण के अधीन आ जाएंगी।


सरकार का स्पष्टीकरण

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस बिल का उद्देश्य संपत्तियों पर कब्जा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यदि FCRA पंजीकरण टूटता या रद्द होता है तो संस्थाओं का कार्य जारी रह सके। इस प्रक्रिया में केवल 'अंतरिम प्रबंधन' की व्यवस्था की जाएगी। जब मूल संस्थाएं वापस लौटेंगी, तब उनकी संपत्तियों को वापस सौंप दिया जाएगा।


उन्होंने यह भी बताया कि धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार ही किया जाएगा।


राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच बातचीत

FCRA बिल: किरन रिजिजू ने संसद में कार्यवाही को सुचारू करने के लिए राहुल गांधी से लगभग 50 मिनट बातचीत की। बैठक में उन्होंने FCRA संशोधन बिल और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन बिल जैसे लंबित विधायी मुद्दों पर चर्चा की।


रिजिजू ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद होने के बावजूद उन्होंने बातचीत का प्रस्ताव रखा है और वे विपक्ष की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


विपक्ष की मांगें और कांग्रेस का रुख

इस बैठक में विपक्ष ने सरकार को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। विपक्ष अपनी दो प्रमुख मांगों पर अड़ा हुआ है। पहली, गृह मंत्री अमित शाह पर 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई के मामले में संसद में आधिकारिक बयान देने का दबाव। दूसरी, अयोध्या में राम मंदिर में दान के पैसे की कथित चोरी पर संसद में चर्चा कराने की मांग।


कांग्रेस ने रिजिजू को स्पष्ट किया है कि वह परिसीमन के खिलाफ है और इस पर उनका रुख अपरिवर्तित है। रिजिजू ने उन्हें पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इस बीच, कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों के साथ एक साझा रणनीति बनाने के लिए अनौपचारिक चर्चा शुरू कर दी है।


अंतरराष्ट्रीय चिंता

भारत में प्रस्तावित FCRA बिल को लेकर अमेरिका में भी चर्चा हो रही है। अमेरिकी सांसद रिले मूर ने इस बिल में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं।


वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मूर ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से भारतीय सरकार को गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति मिलेगी, जो ईसाइयों पर एक स्पष्ट हमला होगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत में ईसाइयों की मौजूदगी का एक लंबा इतिहास है, फिर भी संसद विदेशी अंशदान कानून में ऐसे बदलाव पर विचार कर रही है।


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