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जज रिटायरमेंट उम्र: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दी मोहलत

 06 Aug 2026

जज रिटायरमेंट उम्र: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

जज रिटायरमेंट उम्र: सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। न्यायालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे ट्रायल कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर 2 सितंबर तक अपना फैसला लें। इस दौरान, न्यायालय ने राज्यों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय बोझ संबंधी दलीलों को खारिज कर दिया।


राज्यों ने यह तर्क दिया था कि यदि जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाई जाती है, तो इससे अन्य सरकारी कर्मचारियों में असंतोष उत्पन्न होगा। उनका कहना था कि इससे सरकारी खजाने पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। कुछ राज्यों ने पहले ही न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से 61 वर्ष करने का निर्णय लिया है, जो उनके अन्य कर्मचारियों के लाभ के समान है।


कोर्ट की प्रतिक्रिया

जज रिटायरमेंट उम्र: टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राज्यों की आपत्तियों को अस्वीकार कर दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि जब कोई न्यायिक अधिकारी रिटायर होता है, तो सरकार उसे एकमुश्त रकम और पेंशन देती है, जो उसकी अंतिम सैलरी के आधे से अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, नए जज को नियुक्त करने पर भी वेतन देना पड़ता है। न्यायालय ने कहा कि अनुभवी जजों को बनाए रखना दोनों, राज्य और न्यायपालिका के लिए आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभदायक होगा।


न्यायिक अधिकारियों की स्थिति

सरकारी कर्मचारियों के साथ समानता की दलील को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति संविधान के तहत होती है, जिससे वे सरकारी कर्मचारियों से अलग वर्ग बनाते हैं। बेंच ने राज्यों के महाधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपनी सरकारों को समझाएं कि वे जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर गंभीरता से पुनर्विचार करें।


जज रिटायरमेंट उम्र: बेंच ने यह भी कहा कि मुद्दे को राज्यों के प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से सुलझाया जा सकता है, इसलिए इस बार कोई न्यायिक आदेश पारित करने के बजाय निर्णय राज्यों पर छोड़ दिया गया है। साथ ही, शीर्ष अदालत ने सभी उच्च न्यायालयों से अनुरोध किया है कि वे जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में 'फुल-कोर्ट प्रस्ताव' पारित करें।


पिछले फैसलों का संदर्भ

यह ध्यान देने योग्य है कि 1990 के दशक के आरंभ में भी सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र को 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष किया था। आंकड़ों के अनुसार, 1992 से अब तक ट्रायल कोर्ट के जजों की संख्या दोगुनी होकर 20,000 से अधिक हो गई है। वहीं, हाई कोर्ट के जजों की संख्या भी 1992 में 568 से बढ़कर अब 1,114 हो गई है।


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