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सुप्रीम कोर्ट जज विधेयक: संख्या बढ़ाने का बिल हुआ पारित

 06 Aug 2026

सुप्रीम कोर्ट जज विधेयक: जजों की संख्या में वृद्धि का विधेयक

सुप्रीम कोर्ट जज विधेयक: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित जजों की संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का विधेयक अब संसद से पारित हो गया है। बुधवार को राज्यसभा ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को बहस के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दी। उल्लेखनीय है कि यह विधेयक पहले ही लोकसभा से पारित किया जा चुका था।


राज्यसभा की बैठक दो बार स्थगित होने के बाद बुधवार को दोपहर 2 बजे शुरू हुई। इस दौरान कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को चर्चा के लिए प्रस्तुत किया। विपक्षी दलों के सदस्य, विशेषकर कांग्रेस, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर नारेबाजी कर रहे थे, जिसके कारण हंगामा बरकरार रहा।


विपक्ष का विरोध और चर्चा

सुप्रीम कोर्ट जज विधेयक: उपसभापति हरिवंश ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। हंगामे के बीच ही उपसभापति ने विधेयक पर चर्चा आरंभ की, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने भाग लिया। हालांकि, चर्चा के दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल सदन से वॉकआउट कर गए। बाद में तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, माकपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद चर्चा में शामिल हुए।


सरकार का रुख और न्यायिक सुधार

विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए कानून मंत्री मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक न्यायिक सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जजों की संख्या में वृद्धि से मामले तेजी से निपटाने में सहारा मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि 1950 में सुप्रीम कोर्ट के गठन के समय मुख्य न्यायाधीश सहित जजों की संख्या केवल आठ थी। 2019 में इसे बढ़ाकर 33 किया गया था।


विपक्षी सदस्यों ने न्यायिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया और निचली अदालतों में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की मांग की। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और राजद के संजय यादव ने एससी-एसटी के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जजों की नियुक्ति कॉलेजियम द्वारा की जाती है।


न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट जज विधेयक: राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को अखिल भारतीय न्यायिक प्रणाली के तहत करने की आवश्यकता जताई। कांग्रेस के विवेक तन्खा ने विधेयक लाने में सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उच्चतम न्यायालय को पूरा सम्मान दिया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की मेनका गोस्वामी ने महिलाओं की नियुक्ति की कमी को भी उजागर किया, यह कहते हुए कि उच्च न्यायालयों में 30 फीसदी रिक्तियां हैं और महिला न्यायाधीशों की संख्या केवल 14 फीसदी है।


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