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E20 पेट्रोल: महंगाई के आरोप पर कांग्रेस का सरकार पर हमला।

 05 Aug 2026

E20 पेट्रोल: कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

E20 पेट्रोल: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी संदर्भ में कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि इथेनॉल के मिश्रण के कारण मिडिल क्लास पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और उनके पास विकल्प भी सीमित हो गए हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आरोप लगाया कि यह लाभ केवल इथेनॉल उत्पादकों को हुआ है।


कांग्रेस ने सुझाव दिया कि यदि सरकार को यह ज्ञात था कि इससे गाड़ियों का माइलेज प्रभावित होगा, तो उन्हें पेट्रोल की कीमतों में कमी लानी चाहिए थी।


जयराम रमेश का बयान

कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने बताया कि 2025 से सामान्य पेट्रोल पंपों पर केवल E20 पेट्रोल ही उपलब्ध होगा। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इथेनॉल के मिश्रण से डीजल 50 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल 55 रुपये प्रति लीटर तक मिलने का दावा किया गया था, लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं हुआ।


उन्होंने कहा, "लोगों को कोई राहत नहीं मिली। अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण उपभोक्ताओं ने लगभग 88,234 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए हैं।"


E20 के मायलेज पर चिंता

कांग्रेस ने E20 पेट्रोल के उपयोग से गाड़ियों के मायलेज में कमी की समस्या को भी उठाया। पार्टी का कहना है कि यदि E20 के कारण मायलेज प्रभावित होता है, तो सरकार को इसकी कीमतों में कमी लानी चाहिए थी। नीति आयोग के एथेनॉल रोडमैप में भी E10 और E20 ईंधन पर उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई थी, लेकिन सरकार ने इथेनॉल उत्पादकों को 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मंजूर की।


इसका नतीजा यह हुआ है कि आम जनता पर ईंधन के अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ गया है। जो लोग अपने खून-पसीने की कमाई से वाहन खरीदते हैं, उन्हें अब अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है।


आम नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय भार

कांग्रेस ने कहा कि E20 नीति ने मिडिल क्लास पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाल दिया है। पार्टी का मानना है कि यदि किसी वर्ग को सबसे अधिक लाभ हुआ है, तो वह इथेनॉल उत्पादकों का है, जबकि आम उपभोक्ता को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है।


एक स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच आम नागरिकों ने मिश्रित पेट्रोल के कारण लगभग 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च किया है। लोग E20 पेट्रोल पर सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक पैसे खर्च कर रहे हैं, और इसके बावजूद उनकी गाड़ियों में समस्याएं आ रही हैं।


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