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कर्नाटक पुलिस भर्ती परीक्षा पर गृह मंत्री का विवादित बयान।
03 Aug 2026
कर्नाटक पुलिस भर्ती: प्रदर्शन के बीच खरगे का विवादास्पद बयान
कर्नाटक पुलिस भर्ती: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को एक बयान देकर राजनीतिक विवाद को जन्म दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपना आंदोलन जारी रखते हैं, तो पुलिस उन पर लाठीचार्ज कर सकती है। यह बयान विपक्षी नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी कांग्रेस द्वारा नीट परीक्षा में लीक के खिलाफ दिल्ली में किए गए विरोध-प्रदर्शन के संदर्भ में आया है। प्रियांक खरगे, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र हैं, के इस बयान से विपक्ष ने परीक्षा में गड़बड़ियों पर फिर से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है।
भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताएँ
कर्नाटक पुलिस भर्ती: यह विवाद विजयपुरा जिले के टिकोटा में सिविल पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान हुई कथित अनियमितताओं के चलते उत्पन्न हुआ है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रश्नपत्र लगभग 30 मिनट देरी से वितरित किया गया और विभिन्न कक्षाओं में अलग-अलग प्रक्रियाओं का पालन किया गया। कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र से बाहर निकलकर पुनर्परीक्षा की मांग की, यह कहते हुए कि अनियमितताओं के कारण उन्हें हानि हुई है।
परीक्षा अधिकारियों का स्पष्टीकरण
परीक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह परीक्षा कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) के मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा हॉल से प्रश्नपत्र और OMR शीट ले जाने का प्रयास किया, उन्हें दोबारा प्रवेश नहीं दिया गया। पूरे कर्नाटक में 3,991 सिविल पुलिस कांस्टेबल पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में लगभग 4.54 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, और केवल कुछ केंद्रों पर ही शिकायतें मिली थीं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कर्नाटक पुलिस भर्ती: विपक्ष के नेता आर अशोक ने कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए खरगे से इस्तीफे, प्रभावित केंद्र पर परीक्षा रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि हावेरी और हासन जिलों में भी ऐसी ही अनियमितताओं की सूचना मिली है, जो इस मुद्दे को और गंभीर बनाती है।
खरगे का प्रतिवाद
खरगे ने विपक्ष की मांगों को खारिज करते हुए सवाल उठाया कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले के दौरान भाजपा नेताओं ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि लाखों अभ्यर्थियों में से केवल 120 ने ही आपत्तियाँ जताई थीं। इन बयानों ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है, जिससे विपक्ष ने गृह मंत्री पर अभ्यर्थियों के प्रति असंवेदनशीलता का आरोप लगाया है।
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